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- -पुनर्गठन उप-समिति की पांचवीं बैठक में दी गई जानकारी
- -14 नए उपमंडल, चार तहसील और 27 उप तहसील बनाने के प्रस्ताव भी मिले
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चंडीगढ़। हरियाणा में 11 नए जिले बनाने के लिए प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचे हैं। इनमें करनाल का असंध, अंबाला का नारायणगढ़, गुरुग्राम के मानेसर और पटौदी, कैथल का पिहोवा, हिसार के हांसी और बरवाला, जींद का सफीदों, सोनीपत का गोहाना और सिरसा का डबवाली शामिल हैं। 14 नए उपमंडल, चार तहसील और 27 उप तहसील बनाने के प्रस्ताव मंत्रियों की उप समिति को मिले हैं।
डबवाली और हांसी को प्रदेश सरकार ने पुलिस जिला बनाया हुआ है। सिविल सचिवालय चंडीगढ़ में मंगलवार को पुनर्गठन उप-समिति की पांचवीं बैठक हुई। विकास एवं पंचायत तथा खनन मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में हुई बैठक में समिति सदस्य के रूप में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा शामिल थे।
अब तक पुनर्गठन उप समिति को 73 प्रस्ताव मिले
उप समिति अध्यक्ष पंवार ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता और जनप्रतिनिधियों की मांगों के अनुसार प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन करने के लिए प्रतिबद्ध है। अब तक पुनर्गठन उप समिति को 73 प्रस्ताव मिले हैं। राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा और विशेष सचिव कमलेश कुमार भादू की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद उप समिति ने गांव खुंगा (उपमंडल उचाना) को उपमंडल जींद में और गांव खानपुर रोरण (तहसील पिहोवा) में शामिल करने के लिए प्रदेश सरकार को सिफारिश भेजी है।
पंवार ने बताया कि नए जिले बनाने के लिए 125 से 200 गांव, चार लाख से अधिक आबादी और 80 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल होना जरूरी है। समिति ने उपमंडल, तहसील और उप तहसील बनाने के लिए भी अलग-अलग मानदंड तय किए हैं।
बदलाव के लिए 31 दिसंबर तक की समय सीमा निर्धारित
बैठक में लिए गए निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे। हरियाणा के वर्तमान प्रशासनिक ढांचे की बात करें तो प्रदेश में छह मंडल, 22 जिले, 80 उपमंडल, 94 तहसीलें, 49 उप तहसीलें, 143 खंड, 154 कस्बे और 6841 गांव शामिल हैं। हरियाणा में 31 दिसंबर तक नए जिले और तहसील नहीं बने तो फिर डेढ़ साल से अधिक समय तक इंतजार करना होगा। कारण यह कि अगले साल एक अप्रैल से जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रदेश सरकार को प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव के लिए 31 दिसंबर तक की समय सीमा निर्धारित की है। प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव नहीं हो पाने पर जून 2027 के बाद ही आगे की कार्रवाई हो सकेगी।
