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Weather : बूंदाबांदी के बाद तापमान में गिरावट, भारी गर्मी से राहत नहीं मिली

Weather

  • -हवा में नमी के चलते बढ़ रही उमस, कमजोर पड़ने लगा मानसून
  • -कुछ इलाकों में बरसात हुई, तो कुछ में बूंदाबांदी के बाद आसमान साफ
  • -अधिकतम तापमान 2.0 डिग्री सेल्सियस की कमी के साथ 33.5 डिग्री पर
  • -न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री की कमी के साथ 20.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज

Weather : रेवाड़ी। शुक्रवार की रात व शनिवार तड़के जिले के कई खंडों में हल्की बरसात व बूंदाबांदी हुई। बाद में मौसम साफ हो गया। तेज धूप निकलते ही उमस भरी गर्मी ने लोगों को जमकर परेशान किया। शाम के समय आसमान में छाए बादलों के बीच कई इलाकों में फिर से बूंदाबांदी हुई। मानसून कमजोर पड़ने के कारण तेज बरसात नहीं हो रही है, जिससे उमस भरी गर्मी से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। शनिवार सुबह करीब 5 बजे कुछ इलाकों में हल्की बरसात हुई, तो कुछ इलाकों में बूंदाबांदी के बाद आसमान साफ हो गया। अधिकतम तापमान 2.0 डिग्री सेल्सियस की कमी के साथ 33.5 डिग्री पर आ गया, जबकि न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री की कमी के साथ 20.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा में नमी का स्तर 60 फीसदी तक रहा, जबकि हवा की गति 8 किमी प्रति घंटा रही। सुबह 10 बजे के बाद से ही धूप निकलने के बाद वातावरण में उमस बन गई। चिपचिपाहट भरी गर्मी ने लोगों को पसीने में भिगोए रखा। कूलरों की हवा उमस भरी गर्मी में काम करना बंद कर देती है, जिससे लोगों को भारी गर्मी का सामना करना पड़ता है। शाम के समय एक बार फिर आसमान में बादल गहराने के बाद कई इलाकों में बूंदाबांदी हुई। मौसम विभाग के अनुसार मानसून कमजोर पड़ने से भारी वर्षा नहीं हो रही है। मौसम एक सप्ताह तक इसी तरह का बना रह सकता है। आने वाले सप्ताह के मध्य में तेज बारिश की संभावना है। इस दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

खेतों में फिर चलने लगे फव्वारे

लगभग एक सप्ताह से अच्छी बारिश नहीं होने व गर्मी बढ़ने के कारण किसानों के लिए फसलों की सिंचाई करना जरूरी हो गया है। कपास और बाजरे की सिंचाई के लिए खेतों में एक बार फिर से फव्वारे चलने शुरू हो गए हैं। कपास की फसल में फूल आने शुरू हो गए हैं। बाजरे की अगते फसल में भी दाना बनना शुरू हो गया है। मौसम अनुकूल रहने के कारण दोनों फसलों पर रौनक छाई हुई है। अच्छा फसल उत्पादन होने की संभावना बनी हुई है। अगर एक बार फिर से अच्छी बारिश होती है, तो इससे किसानों को सिंचाई से छुटकारा मिल जाएगा।

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