Economy
- नीति आयोग के सीईओ ने शासी परिषद की 10वीं बैठक में दी जानकारी
- सुब्रह्मण्यम बोले, आज हम 4,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था
- इस समय वैश्विक और आर्थिक माहौल भारत के अनुकूल
- 2028 तक जर्मनी को पछाड़कर तीसरे स्थान पर पहुंचेंगे
- अब केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी ही भारत से बड़े
- भारत ने यह उपलब्धि इकोनॉमिक पॉलिसी के कारण हासिल की
Economy : नई दिल्ली। नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने रविवार को कहा कि भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। सुब्रह्मण्यम ने नीति आयोग शासी परिषद की 10वीं बैठक के बाद कहा कि कुल मिलाकर वैश्विक और आर्थिक माहौल भारत के अनुकूल है। उन्होंने कहा, ‘मैं जब बोल रहा हूं, तब हम चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। आज हम 4,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए सुब्रह्मण्यम ने कहा कि आज भारत की अर्थव्यवस्था जापान से बड़ा है। उन्होंने कहा, ‘केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी ही भारत से बड़े हैं और अगर हम अपनी योजना और सोच पर कायम रहते हैं, तो ढाई-तीन साल यानी 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे।’ भारत 2024 तक दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था।
प्रति व्यक्ति आय भी दोगुना हुई
आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति आय 2013-14 में 1,438 अमेरिकी डॉलर से दोगुनी होकर 2025 में 2,880 अमेरिकी डॉलर हो गई है।
भारत को यह फायदा
-वैश्विक प्रभाव में बढ़ोतरी : भारत का अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे जी20 और आईएमएफ में प्रभाव बढ़ेगा।
-इन्वेस्टमेंट हब : भारत में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) में और वृद्धि होगी, क्योंकि ग्लोबल कंपनियां भारत को एक आकर्षक बाजार के रूप में देख रही हैं।
-क्षेत्रीय स्थिरता : भारत और जापान के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी, जैसे चंद्रयान-5 और सैन्य सहयोग, भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देगी।
-इकोनॉमिक लीडरशिप : भारत इस उपलब्धि के बाद ग्लोबल इकोनॉमिक लीडरशिप की दिशा में और करीब आ गया है। भारत अगर 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देता है तो लीडरशिप और मजबूत होगी।
रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
-रोजगार के अवसर : तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से नए रोजगार सृजित होंगे, खासकर तकनीक, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में।
-बेहतर जीवन स्तर : बढ़ती जीडीपी और निवेश से इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार होगा।
-कंज्यूमर पावर : बढ़ती आय और मध्यम वर्ग के विस्तार से उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ेगी।
-चुनौतियां : आय का असमान डिस्ट्रीब्यूशन और महंगाई जैसी चुनौतियां बनी रह सकती हैं, जिन्हें सरकार को संबोधित करना होगा।
अब आगे क्या
आईएमएफ और अन्य वैश्विक संस्थानों के अनुमानों के अनुसार, यदि भारत की वर्तमान वृद्धि दर बनी रहती है, तो 2028 तक भारत जर्मनी (4.9 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी) को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। भारत की जीडीपी 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर और 2028 तक 5.58 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके बाद केवल अमेरिका (30.57 ट्रिलियन डॉलर) और चीन (19.231 ट्रिलियन डॉलर) ही भारत से आगे रहेंगे।