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School : अब स्कूलों में बिना बिजली के पढ़ाई को मजबूर नहीं हैं छात्र!

स्कूलों में बिजली की उपलब्धता।स्कूलों में बिजली की उपलब्धता।

School

  • -कांग्रेस के संप्रग शासन के 53 फीसदी की तुलना में मोदी सरकार में 91.8 फीसदी तक जा पहुंची बिजली की उपलब्धता
  • -केंद्र ने स्कूलों में बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हुए विभिन्न मुद्दों पर भी काफी तेजी से काम किया

School : नई दिल्ली। केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार के दस वर्षीय कार्यकाल में देश में लगभग सभी स्कूलों में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाली पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के शासन में वर्ष 2013-14 में यह आंकड़ा 53 फीसदी पर था। इसके बाद दस साल बीतने पर वर्ष 2023-24 में बढ़कर यह 91.8 फीसदी पर जा पहुंचा है। इसके अलावा स्कूलों के संपूर्ण विकास और छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए केंद्र ने स्कूलों में बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हुए विभिन्न मुद्दों जैसे पीने का पानी, लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय, कंप्यूटर, इंटरनेट, खेल का मैदान, पुस्तकालय, हाथ धोने की सुविधा, रैंप और बरसाती पानी की उपलब्धता को बनाए रखने पर भी काफी तेजी से काम किया है। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पत्रकारों से बातचीत में साझा की।

स्कूलों में बढ़ी इंटरनेट की पहुंच

बीते एक दशक में जहां स्कूलों में बिजली की पहुंच 53 से बढ़कर 91.8 फीसदी हो गई। वहीं, बच्चों के लिए कंप्यूटर की उपलब्धता 24.‍से बढ़कर 57.2 फीसदी तक जा पहुंची। इंटरनेट 2012-13 के 7.3 फीसदी की तुलना में एक दशक में बढ़कर 53.9 फीसदी तक जा पहुंचा है। स्कूलों में पीने के पानी की मौजूदगी की बात करें तो उससे संबंधित आंकड़ा 83.2 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 98.3 हो गया है। इसके अलावा संप्रग सरकार में स्कूलों में बनी हुई 66.9 फीसदी खेलकूद के मैदानों की उपलब्धता अब 82.4 तक जा पहुंची है। स्कूलों में पुस्तकालयों की संख्या 76.4 फीसदी की तुलना में दस साल में बढ़कर 89 फीसदी हो गई है। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में रैंप की उपलब्धता में भी दस साल में काफी सुधार देखने को मिला है। यह आंकड़ा 56.8 से बढ़कर 77.1 हो गया है।

तेजी से हुआ शौचालय निर्माण

मंत्रालय के आंकड़ों के हिसाब से बीते दस वर्षों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालयों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। वर्ष 2012-13 में लड़कियों के लिए शौचालयों का आंकड़ा 91‍.2 फीसदी से बढ़कर 2023-24 में 97.2 फीसदी तक और लड़कों के लिए 86.7 फीसदी से बढ़कर 95.7 हो गया है। स्कूलों में छात्रों के लिए हाथ धोने की सुविधा 43.1 से बढ़कर 94.7 फीसदी हो गई। वहीं, स्कूलों में बारिश के पानी की उपलब्धता संप्रग शासनकाल के 4.2 फीसदी के मुकाबले अब तक बढ़कर 28.4 फीसदी पर और स्कूलों में लगने वाली रेलिंग की सुविधा पहले के 4.2 फीसदी की तुलना में बढ़कर 28.4 फीसदी तक जा पहुंची है।

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