mausam
- जिले में अधिकतम तापमान 28.5 व न्यूनतम तापमान 17.5 डिग्री दर्ज
- मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल परिवर्तनशील रहेगा मौसम
- बदलते मौसम के दृष्टिगत वैज्ञानिकों की टीम ने किया गेहूं फसल का अवलोकन
हिसार में रविवार तड़के हुई हल्की बूंदाबांदी ने मौसम को खुशनुमा बना दिया। इससे बढ़ते तापमान पर फिलहाल ब्रेक लग गया और दिन में हल्की गर्मी के बाद शाम को फिर ठंडक महसूस की गई। प्रदेश के कई क्षेत्रों में हल्की बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि के कारण भी मौसम में ठंडापन बना रहा। रविवार तड़के करीब 4:10 बजे अचानक मौसम ने करवट ली और बादलों की गर्जना के साथ तेज बूंदाबांदी शुरू हो गई। हालांकि बारिश ज्यादा देर तक नहीं चली, लेकिन तेज फुहारों के कारण मौसम में ठंडक घुल गई। सुबह तक इसका असर रहा, जबकि दोपहर में फिर हल्की गर्मी महसूस की गई। देर शाम तक आसमान में बादल छाए रहे और बारिश की संभावना बनी रही।
तापमान में आई गिरावट
हल्की बारिश और बदले मौसम के कारण जिले के बढ़ते तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
रविवार को हिसार में अधिकतम तापमान 28.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
प्रदेश में कई जगह बारिश और ओलावृष्टि
* हरियाणा के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश
* कुछ क्षेत्रों में हल्की ओलावृष्टि
* पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में बदलाव
* 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली ठंडी हवाएं
अगले कुछ दिन ऐसा रहेगा मौसम
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ के अनुसार प्रदेश में फिलहाल मौसम परिवर्तनशील बना रहेगा।
उन्होंने बताया कि चरखी दादरी, भिवानी, झज्जर, रोहतक, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, रेवाड़ी और गुरुग्राम सहित कई जिलों में अगले दो से तीन दिनों तक गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है।
किसानों के लिए सलाह
* फिलहाल सिंचाई करने से बचें
* कीटनाशकों का छिड़काव टालें
* मौसम साफ होने के बाद ही खेतों में काम करें
* कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें
वैज्ञानिकों की टीम ने गेहूं फसल का लिया जायजा
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित वैज्ञानिकों की टीम ने गेहूं की विभिन्न किस्मों और प्रशिक्षणों का अवलोकन किया। टीम का नेतृत्व पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के डॉ. वी.एस. सोहूं ने किया। वरिष्ठ गेहूं वैज्ञानिक डॉ. ओ.पी. बिश्नोई के अनुसार यदि तेज हवा और ओलावृष्टि न हो तो हल्की बारिश खासकर पछेती गेहूं के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
मार्च के अंत तक सक्रिय रहेंगी पश्चिमी प्रणालियां
राजकीय महाविद्यालय नारनौल के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार मार्च के अंतिम दिनों और अप्रैल के पहले सप्ताह के दौरान तीन से चार पश्चिमी मौसम प्रणालियां सक्रिय हो सकती हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि मौसम की स्थिति को देखते हुए कृषि कार्य करें और कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान परउ रखें।
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