Mission Olympic 2036
झज्जर (हरियाणा)।
हरियाणा सरकार जहां Mission Olympic 2036 के जरिए देश को खेल महाशक्ति बनाने के दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ओलंपिक पदक विजेता गांव माजरा (दूबलधन) का खेल स्टेडियम आज भी जलभराव, गंदगी और सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
करीब 25 साल पहले बने इस खेल स्टेडियम की हालत आज किसी कूड़े के ढेर या जोहड़ से बेहतर नहीं है। हैरानी की बात यह है कि हाल ही में झज्जर जिले के स्टेडियमों की खेल सुविधाओं को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में माजरा स्टेडियम को एजेंडे में ही शामिल नहीं किया गया।
पदक देने वाला गांव, स्टेडियम बना जोहड़
लगभग 5 एकड़ में फैले माजरा खेल स्टेडियम में सालभर पानी भरा रहता है। जलीय घास, काबली कीकर और गंदगी ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया है।
स्टेडियम की चारदीवारी जर्जर हो चुकी है, खेल मंच और दो कमरों का भवन खंडहर में तब्दील होने की कगार पर हैं।
आज हालात ऐसे हैं कि जहां कभी खिलाड़ी अभ्यास किया करते थे, वहां अब नशाखोरों, जुआरियों और आवारा पशुओं का कब्जा है।
ओलंपियन और अर्जुन अवॉर्डियों का गांव
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यही वह गांव है जिसने देश को:
-
साक्षी मलिक जैसी ओलंपिक पदक विजेता
-
सत्यवान और सत्यव्रत जैसे अर्जुन अवॉर्डी पहलवान
-
प्रो-कबड्डी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी
दिए हैं।
हाल ही में पहलवान उधम सिंह ने थाईलैंड में भारत का नाम रोशन किया, लेकिन उनका सम्मान समारोह स्टेडियम में नहीं, बल्कि सामुदायिक भवन में करना पड़ा, क्योंकि स्टेडियम जलभराव से ग्रस्त था।
युवाओं को सड़कों पर अभ्यास की मजबूरी
खेल सुविधाओं के अभाव में माजरा के युवा सड़कों पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। इससे न सिर्फ चोट का खतरा बना रहता है, बल्कि कई प्रतिभाएं निखरने से पहले ही दम तोड़ रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते खेल ढांचे का विकास नहीं हुआ, तो युवा नशे जैसी सामाजिक बुराइयों की ओर और तेजी से बढ़ेंगे।
जल निकासी लाइन होते हुए भी समाधान नहीं
स्थानीय लोगों के अनुसार, स्टेडियम के पास से जल निकासी की पाइपलाइनें गुजरती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से आज तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
डॉ. दयानंद कादयान बताते हैं कि स्टेडियम सुधार को लेकर सीएम विंडो और ईमेल के जरिए कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पूर्व जिला पार्षद जयभगवान का कहना है कि गांव में शराब ठेके तो आधुनिक बनाए जा रहे हैं, लेकिन खेल स्टेडियम प्रशासन की प्राथमिकता में नहीं है।
एनसीआर का इंटरनेशनल स्पोर्ट्स हब बन सकता है माजरा
माजरा गांव झज्जर, रोहतक और चरखी दादरी जिलों की सीमा पर स्थित है। यदि यहां आधुनिक सुविधाओं वाला खेल स्टेडियम विकसित किया जाए, तो यह इलाका एनसीआर का अंतरराष्ट्रीय खेल केंद्र बन सकता है।
यदि भविष्य में विदेशी खिलाड़ी राष्ट्रमंडल या ओलंपिक की तैयारी के लिए यहां आएं और यह बदहाली देखें, तो यह देश की खेल छवि के लिए भी शर्मनाक होगा।
Mission Olympic 2036: नारा या हकीकत?
सवाल साफ है —
क्या हरियाणा सरकार सिर्फ पदक गिनने तक सीमित रहेगी या खिलाड़ियों की जड़ों को भी मजबूत करेगी?
यदि माजरा का स्टेडियम सुधरता है, तो यहां से सैकड़ों नए ओलंपियन निकल सकते हैं।
अगर नहीं, तो Mission Olympic 2036 सिर्फ एक नारा बनकर रह जाएगा।
यह भी जानिए
-
स्टेडियम की उम्र: लगभग 25 वर्ष
-
क्षेत्रफल: करीब 5 एकड़
-
वर्तमान हालत: स्थायी जलभराव, गंदगी, जर्जर ढांचा
-
उपलब्धियां: ओलंपिक, एशियाड, अर्जुन अवॉर्डी पहलवानों का गांव
-
मुख्य मांग: जल निकासी व्यवस्था और आधुनिक खेल सुविधाएं
सरकार से पूछे जाने वाले सवाल
-
माजरा स्टेडियम को समीक्षा बैठक के एजेंडे से बाहर क्यों रखा गया?
-
ओलंपियन गांवों के लिए घोषित योजनाएं जमीन पर क्यों नहीं दिख रहीं?
-
युवाओं को नशे से बचाने के लिए खेल ढांचे पर निवेश कब होगा?


