Budget expectation
- बजट 2026 से उम्मीद है कि सरकार कृषि को केवल सब्सिडी-आधारित क्षेत्र न मानकर, उत्पादन, निर्यात और निवेश-केंद्रित नीति की ओर बढ़ेगी
- एमएसपी को प्रभावी बनाने, मूल्य स्थिरीकरण कोष के विस्तार और बाजार जोखिम से किसानों को सुरक्षा देने के संकेत मिल सकते हैं।
- कोल्ड चेन, भंडारण, फूड प्रोसेसिंग और डिजिटल सप्लाई चेन में निवेश से फसल बर्बादी घटाने और मूल्य संवर्धन पर जोर रहेगा।
- खाद्य तेल, दाल और महिला-नेतृत्व वाली खेती को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक कृषि बाजार में मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा
- क्या बजट 2026 भारतीय कृषि के लिए नई दिशा तय करेगा?
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था एक अहम मोड़ पर खड़ी है। एक ओर वैश्विक व्यापार दबाव, खासकर भारत–अमेरिका व्यापार वार्ताओं में कृषि को लेकर बढ़ता तनाव है, तो दूसरी ओर देश के भीतर किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खेती की बड़ी चुनौती। ऐसे समय में बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार केवल खर्च और सब्सिडी का लेखा-जोखा न पेश करे, बल्कि कृषि नीति में ठोस और दूरगामी बदलाव की दिशा दिखाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत अपने किसानों, डेयरी क्षेत्र और मछुआरों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट इस राजनीतिक संदेश को किस तरह ज़मीनी नीति में बदलता है।
बजट 2026: कृषि के लिए संभावनाएं और प्राथमिकताएं
🌾 1. उत्पादन बढ़ाने पर फोकस
बढ़ती आबादी और बदलते जलवायु हालात के बीच उत्पादन बढ़ाना सबसे बड़ी जरूरत है।
बजट से उम्मीदें:
• कृषि अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए अधिक आवंटन
• जलवायु-सहिष्णु बीजों और फसलों को बढ़ावा
• ड्रोन, सटीक खेती (Precision Farming) और AI आधारित सलाह
• छोटे और सीमांत किसानों तक तकनीक की पहुंच
• कृषि विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को मजबूत करना
🏗️ 2. भंडारण, प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स में निवेश
भारत में हर साल बड़ी मात्रा में कृषि उपज बर्बाद हो जाती है, जिससे किसानों को नुकसान होता है।
मुख्य अपेक्षाएं:
• कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज़ विस्तार
• आधुनिक गोदाम और वेयरहाउसिंग क्षमता में बढ़ोतरी
• फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए आसान ऋण और सब्सिडी
• फार्म-टू-मार्केट लॉजिस्टिक्स में निजी निवेश को प्रोत्साहन
• डिजिटल सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम
💰 3. किसानों को बेहतर कीमत और आय सुरक्षा
किसान की आय तभी बढ़ेगी जब उसे उसकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा।
बजट से संभावित कदम:
• न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना
• मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) का दायरा बढ़ाना
• प्याज और दाल के साथ-साथ चावल, गेहूं और आटा शामिल करना
• बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से किसानों की सुरक्षा
• किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाना
🚜 4. कृषि में निवेश और बजट आवंटन बढ़ने की उम्मीद
पिछले वर्षों में कृषि पर वास्तविक खर्च घोषित आवंटन से कहीं अधिक रहा है।
संभावनाएं:
• कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए अधिक बजट आवंटन
• सब्सिडी के साथ-साथ पूंजीगत निवेश पर जोर
• तकनीक-आधारित खेती को प्रोत्साहन
• निर्यात-उन्मुख कृषि योजनाओं को समर्थन
• कृषि स्टार्ट-अप्स और एग्री-टेक को बढ़ावा
🛢️ 5. खाद्य तेल और दालों में आत्मनिर्भरता
भारत आज भी खाद्य तेलों के लिए आयात पर निर्भर है।
बजट से अपेक्षाएं:
• राष्ट्रीय खाद्य तेल–तिलहन मिशन के लिए अधिक फंड
• परती भूमि को तिलहन उत्पादन में लाने के लिए प्रोत्साहन
• 2030 तक उत्पादन लक्ष्य हासिल करने की स्पष्ट रणनीति
• आत्मनिर्भर दाल मिशन को और मजबूती
• किसानों को प्रमाणित बीज और तकनीकी सहायता
👩🌾 6. महिला किसानों पर विशेष ध्यान
2026 को संयुक्त राष्ट्र ने “अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष” घोषित किया है।
संभावित पहल:
• महिला-नेतृत्व वाली कृषि परियोजनाओं को बजटीय समर्थन
• महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को कृषि से जोड़ना
• प्रशिक्षण, ऋण और मार्केट एक्सेस में प्राथमिकता
• ग्रामीण आजीविका और पोषण सुरक्षा पर फोकस
• लैंगिक असमानता को कम करने की ठोस योजनाएं
7. वैश्विक मंच पर भारत की कृषि प्रतिस्पर्धा
2026 में भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करेगा।
उम्मीदें:
• कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए विशेष पैकेज
• अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुधार
• किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की नीति
• व्यापार समझौतों में कृषि हितों की सुरक्षा
• “मेक इन इंडिया” से “ग्रो इन इंडिया” की ओर कदम
निष्कर्ष: क्या बजट 2026 बदलाव की शुरुआत बनेगा?
कृषि आज भी भारत की आबादी के एक बड़े हिस्से की आजीविका है, लेकिन विकास की रफ्तार धीमी बनी हुई है। बजट 2026 सरकार के सामने एक बड़ा अवसर है—या तो वह पुरानी नीतियों और सब्सिडी के ढांचे पर चलता रहे, या फिर कृषि को आधुनिक, टिकाऊ और वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदले।
अगर बजट उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य और संरक्षण—इन सभी पहलुओं पर संतुलित ध्यान देता है, तो यह भारतीय कृषि के लिए नई फसल की शुरुआत साबित हो सकता है।
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