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Automatic Income-बजट उम्मीद: कई जगहों से कमाने वालों के लिए हो ऑटोमैटिक आय रिपोर्टिंग, अनुपालन हो आसान

Byadmin

Jan 30, 2026
बजट उम्मीद

बजट उम्मीद: कई जगहों से कमाने वालों के लिए हो ऑटोमैटिक आय रिपोर्टिंग, अनुपालन हो आसान

बजट से आम लोग केवल टैक्स छूट और कर कटौती की ही नहीं, बल्कि नियमों के सरलीकरण की भी बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। खासतौर पर वे लोग, जो एक से अधिक स्रोतों से आय अर्जित करते हैं।
वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना अपेक्षाकृत आसान होता है, क्योंकि फॉर्म-16 और प्री-फिल्ड डेटा के कारण गलतियों की संभावना कम रहती है। लेकिन औपचारिक वेतन व्यवस्था से बाहर काम करने वालों के लिए स्थिति बिल्कुल अलग है।


 गिग इकॉनमी के विस्तार से बढ़ीं चुनौतियां

गिग इकॉनमी (Gig Economy) के तेजी से बढ़ने ने कर अनुपालन को जटिल बना दिया है।
फ्रीलांसर, प्लेटफॉर्म-आधारित कर्मचारी और अन्य स्वतंत्र कार्यबल:

  • कई स्रोतों से आय अर्जित करते हैं

  • अलग-अलग टीडीएस दरों का सामना करते हैं

  • बिखरे हुए डिजिटल भुगतान का हिसाब रखते हैं

यदि इसमें क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय भी जोड़ दी जाए, तो टैक्स अनुपालन उनके लिए और अधिक बोझिल हो जाता है।


युवाओं को क्यों हो रही ज्यादा परेशानी?

तकनीक-प्रेमी होने के बावजूद युवा करदाता:

  • अग्रिम कर (Advance Tax)

  • विभिन्न टीडीएस दरें

  • जीएसटी से जुड़ाव

  • विस्तृत रिपोर्टिंग शेड्यूल

जैसी जटिल अवधारणाओं से जूझते हैं।
समस्या जानकारी की कमी नहीं, बल्कि यह है कि मौजूदा कर प्रणाली आधुनिक आय पैटर्न को ठीक से दर्शाती नहीं है


 पूर्ण रिपोर्टिंग से घटेंगी त्रुटियां

वार्षिक सूचना विवरण (AIS) और प्री-फिल्ड टैक्स रिटर्न एक सकारात्मक कदम हैं।
हालांकि, अभी इनमें मुख्य रूप से:

  • वेतन

  • ब्याज

  • लाभांश

  • कुछ निवेश आय

ही शामिल हैं।
गिग, फ्रीलांस और प्लेटफॉर्म आधारित आय या तो आंशिक रूप से दर्ज होती है या पूरी तरह शामिल नहीं होती।

 यदि AIS और फॉर्म 26AS में ऐसी आय का बेहतर वर्गीकरण और पूर्ण रिपोर्टिंग हो, तो:

  • गलतियों की गुंजाइश घटेगी

  • समय पर रिटर्न दाखिल करने को बढ़ावा मिलेगा


 गिग और प्लेटफॉर्म आय के लिए अलग प्रावधान जरूरीबजट उम्मीद

आयकर रिटर्न फॉर्म समय के साथ विकसित नहीं हुए हैं।
गिग और प्लेटफॉर्म आय के लिए स्पष्ट रूप से परिभाषित शेड्यूल का अभाव गलत या कम रिपोर्टिंग का कारण बनता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • टैक्स फॉर्म में गिग आय के लिए अलग सेक्शन

  • ऑटोमेटेड डेटा एंट्री

  • सरल व्यय कटौती विकल्प

अनुपालन को काफी आसान बना सकते हैं।


 समयबद्ध फेसलेस अपील है जरूरी

फेसलेस आकलन और अपील की व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी।
हालांकि आकलन में प्रगति हुई है, लेकिन अपीलों के निपटान में देरी अब भी बड़ी समस्या है।

छोटे कर विवाद भी महीनों या वर्षों तक लंबित रहने पर:

  • मानसिक तनाव

  • वित्तीय अनिश्चितता

का कारण बनते हैं।
स्पष्ट समय-सीमा और नियमित अपडेट से करदाताओं का भरोसा बढ़ सकता है।


 रिफंड प्रक्रिया की पारदर्शी ट्रैकिंग जरूरी

रिफंड में देरी आज भी करदाताओं की प्रमुख चिंता बनी हुई है।
यदि रियल-टाइम ट्रैकिंग उपलब्ध हो, जिसमें:

  • रिफंड की स्थिति

  • संभावित समय-सीमा

  • देरी के कारण

स्पष्ट रूप से दिखें, तो करदाताओं का भरोसा और मजबूत होगा।


 सरल भाषा में हो कर संहिता

क्रिप्टो लेनदेन, विदेशी आय और गिग आय से जुड़े नियमों में स्पष्टता बेहद जरूरी है।
जटिल शब्दावली से मुक्त और सरल भाषा में लिखी गई कर संहिता अनुपालन को आसान बना सकती है।

आयकर अधिनियम, 2025 इस दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का अगला कर सुधार तकनीक से ज्यादा डिजाइन और उपयोगकर्ता अनुभव पर केंद्रित होगा।

  निष्कर्ष

ऑटोमैटिक आय रिपोर्टिंग, समयबद्ध फैसले और पारदर्शी प्रक्रियाएं कर प्रणाली को सरल, तेज और भरोसेमंद बना सकती हैं।
यदि बजट में इन पहलुओं पर ध्यान दिया गया, तो गिग वर्कर्स और युवा करदाताओं के लिए टैक्स अनुपालन एक बोझ नहीं, बल्कि सहज अनुभव बन सकता है।

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