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Balaji के श्रीचरणों में एक किलो वजनी स्वर्ण कलश अर्पित, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ऐतिहासिक अनुष्ठान

Byadmin

Jan 29, 2026

जगदलपुर। बालाजी मंदिर में आयोजित रजत जयंती महोत्सव के अंतर्गत तीसरे दिन गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं का भव्य संगम देखने को मिला। प्रातः नित्य आराधना एवं विशेष हवन के साथ पूजा विधान का शुभारंभ हुआ।

आंध्र प्रदेश से पधारे वैदिक पंडितों के सानिध्य में भक्तों द्वारा अर्पित एक किलो वजनी स्वर्ण कलश को विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान बालाजी के श्रीचरणों में समर्पित किया गया। बताया जा रहा है कि इस स्वर्ण कलश का वजन लगभग 1 किलोग्राम है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है।


🌸 बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित

इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों द्वारा समर्पित शहद को इसी स्वर्ण कलश में संग्रहित किया गया, जिसका उपयोग गुरुवार सुबह होने वाले महाअभिषेक में किया जाएगा।

सुबह 9 बजे से प्रारंभ होने वाले इस महाअभिषेक में भगवान बालाजी के साथ-साथ माता आंडाल और माता पद्मावती का भी स्वर्ण, रजत एवं लक्ष्मी कलशों से अभिषेक किया जाएगा।


🪔 अभिषेक के उपरांत महाआरती

महाअभिषेक के दौरान:

  • पंचगव्य

  • पंचामृत

  • दूध, दही

  • इत्र और अष्टगंध

  • विभिन्न सुगंधित द्रव्यों

से भगवान का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद भव्य महाआरती संपन्न होगी, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।


💍 रात में सजेगा श्रीनिवास कल्याणम् का दिव्य उत्सव

रजत जयंती महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार रात्रि को विशेष धार्मिक विधान “श्रीनिवास कल्याणम्” का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भगवान बालाजी के विवाह उत्सव का सजीव मंचन होगा।

कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां:

  • वर-वधु संवाद

  • मंगलाचार एवं वैदिक मंत्र

  • पारंपरिक विवाह रस्में

  • ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ भव्य बारात

पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर रहेगा।


🌼 शुक्रवार को महिलाओं के लिए विशेष कुमकुम पूजा

रजत जयंती महोत्सव के पांचवें दिन शुक्रवार को प्रातः नित्य आराधना एवं विशेष हवन के पश्चात सुबह 10 बजे से महिलाओं के लिए विशेष कुमकुम पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने की उम्मीद है।


📝 निष्कर्ष

भगवान बालाजी के श्रीचरणों में स्वर्ण कलश अर्पण का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि रजत जयंती महोत्सव की ऐतिहासिक भव्यता को भी दर्शाता है। वैदिक परंपराओं, भक्तों की सहभागिता और दिव्य आयोजनों के साथ यह उत्सव श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बनता जा रहा है।

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