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Self Reliant Village गांव खुद कमाएगा, गांव खुद संवरेगा – आरएसडीबीएम ट्रस्ट की पहल बनी चर्चा का विषय

Byadmin

Jan 25, 2026
Self Reliant Villageसुमित भयाना चेयरमैन, आरएसडीबीएम ट्रस्ट, रोहतक

Self Reliant Village

आत्मनिर्भर गांव की दिशा में बड़ा कदम: भाली आनंदपुर में शुरू हुई बेकरी प्रोडक्शन यूनिट

 आत्मनिर्भर भारत

देशभर में आत्मनिर्भर भारत अभियान की चर्चा के बीच हरियाणा के रोहतक जिले के गांव भाली आनंदपुर से एक ऐसी पहल सामने आई है, जो यह साबित करती है कि गांव चाहें तो अपने दम पर न केवल रोजगार पैदा कर सकते हैं, बल्कि अपने विकास की दिशा भी खुद तय कर सकते हैं। श्री राम सरण दास भ्याना मेमोरियल ट्रस्ट (आरएसडीबीएम ट्रस्ट) ने गांव को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यहां एक बेकरी प्रोडक्शन यूनिट की स्थापना की है। इस यूनिट से होने वाली पूरी आय गांव के विकास कार्यों में ही खर्च की जाएगी।

Self Reliant Village

अक्सर गांवों में यह धारणा बनी रहती है कि सड़क, गली, चौपाल, स्कूल या अन्य बुनियादी सुविधाएं तभी बनेंगी जब कोई बाहरी व्यक्ति, उद्योगपति या समाजसेवी मदद करेगा। यही सोच गांवों को आत्मनिर्भर बनने से रोकती है। आरएसडीबीएम ट्रस्ट की यह पहल इसी मानसिकता को बदलने का प्रयास है, ताकि गांव खुद अपनी आमदनी पैदा करे और उसी से अपने विकास का रास्ता तैयार करे।

गांव में रोजगार, गांव से उत्पादन

भाली आनंदपुर में शुरू की गई बेकरी प्रोडक्शन यूनिट का सबसे बड़ा उद्देश्य स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराना है। इस यूनिट में काम करने वाले सभी कर्मचारी गांव के ही युवक और युवतियां होंगे। इसके साथ ही बेकरी में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी गांव और आसपास के किसानों से खरीदा जाएगा।

यूनिट में बिस्किट, नमकीन और अन्य बेकरी उत्पाद पूरी तरह शुद्ध और गुणवत्ता युक्त सामग्री से तैयार किए जाएंगे। इस तरह यह पहल गांव की मेहनत, गांव के संसाधन और गांव के लोगों को एक ही मंच पर जोड़ती है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि किसानों को भी अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

Self Reliant Village

मुनाफा सीधे गांव के विकास में खर्च होगा

बेकरी यूनिट से होने वाला मुनाफा किसी व्यक्ति विशेष के पास न जाकर गांव के एक कॉमन अकाउंट में जमा किया जाएगा। इस खाते का संचालन गांव के सम्मानित लोगों की एक कमेटी करेगी। कमेटी यह तय करेगी कि जमा राशि का उपयोग किस विकास कार्य पर किया जाए, जैसे सड़क निर्माण, गलियों का सुधार, चौपाल, शिक्षा, स्वच्छता या अन्य सामाजिक जरूरतें।

इस व्यवस्था से पारदर्शिता बनी रहेगी और गांव के लोग खुद यह महसूस करेंगे कि उनकी मेहनत से आया पैसा सीधे उनके गांव के विकास में लग रहा है।

ग्राहक को मिलेगा गांव का लाइव अनुभव

इस बेकरी प्रोडक्शन यूनिट की एक अनोखी खासियत यह भी है कि ग्राहक अपने उत्पाद को बनते हुए देख सकेगा। जो ग्राहक सीधे गांव आकर खरीदारी करेंगे, उन्हें ग्रामीण जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। वे देसी भोजन का स्वाद ले सकेंगे और दूध निकालने, लस्सी व घी बनाने जैसी पारंपरिक प्रक्रियाओं को समझ सकेंगे।

जो ग्राहक गांव नहीं आ पाएंगे, उनके लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। ऐसे ग्राहकों को एक लाइव वीडियो लिंक भेजा जाएगा, जिसके जरिए वे मोबाइल या अन्य डिवाइस पर अपने उत्पाद को बनते हुए देख सकेंगे। इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और गांव से उनका भावनात्मक जुड़ाव भी बनेगा।

शुद्धता बनेगी ब्रांड की पहचान

आज के समय में खाद्य पदार्थों में मिलावट एक बड़ी समस्या बन चुकी है। आरएसडीबीएम ट्रस्ट का मानना है कि शुद्धता ही किसी भी खाद्य उत्पाद की सबसे बड़ी पहचान होती है। इसी सोच के साथ बेकरी यूनिट में गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

शुद्धता के इसी भरोसे के आधार पर बेकरी के उत्पादों को भाली आनंदपुर और आसपास के गांवों से लेकर रोहतक शहर और अन्य शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना है। भविष्य में गांव के युवाओं को ही मार्केटिंग और बिक्री के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे रोजगार के और अवसर पैदा होंगे।

गांव भी खड़ा कर सकता है अपना उद्योग

आरएसडीबीएम ट्रस्ट की यह पहल इस सोच को भी मजबूत करती है कि बड़े-बड़े उद्योग गांव पर निर्भर होते हैं, क्योंकि दूध, गेहूं, गन्ना, सब्जी और कपास जैसी जरूरी चीजें गांव से ही आती हैं। जब बड़े उद्योग गांव पर निर्भर हैं, तो गांव खुद भी अपने लिए छोटे और मजबूत उद्योग खड़े कर सकता है।

बेकरी यूनिट की सफलता के बाद गांव के अन्य लोग भी सरकार की MSME योजनाओं के तहत लोन और निःशुल्क प्रशिक्षण लेकर आचार, जैम, आटा चक्की, कपड़ा, खाद या सब्जी सप्लाई जैसी छोटी-छोटी इकाइयां शुरू कर सकेंगे। इससे गांव में रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने की संस्कृति विकसित होगी।

आत्मनिर्भर गांव का मॉडल बनेगा भाली आनंदपुर

आरएसडीबीएम ट्रस्ट की यह पहल सिर्फ एक बेकरी प्रोडक्शन यूनिट लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव आधारित आत्मनिर्भर विकास मॉडल तैयार करने की कोशिश है। ट्रस्ट का मानना है कि जब एक यूनिट सफल होगी, तो गांव के अन्य लोग भी इससे प्रेरणा लेंगे और अपने स्तर पर नए प्रयास शुरू करेंगे।

अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो भाली आनंदपुर हरियाणा ही नहीं, बल्कि देश के अन्य गांवों के लिए भी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन सकता है। यह मॉडल दिखाएगा कि सही सोच, सामूहिक प्रयास और पारदर्शिता के साथ गांव अपने भविष्य को खुद संवार सकते हैं।

सुमित भयाना चेयरमैन

आरएसडीबीएम ट्रस्ट, रोहतक

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