Selling Of Land
- पीड़ित ने आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की
- जाली हस्ताक्षरों के सहारे उनकी फर्म की जमीन गैरकानूनी तरीके से बेच दी
गन्नौर। तहसील में गन्नौर के गांव बांय में 36 कनाल जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर धोखाधड़ी से बिक्री किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में दिल्ली निवासी व्यवसायी विकास कुमार पाडिया ने तहसील प्रशासन को दरखास्त देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत फर्जी अथॉरिटी लेटर और जाली हस्ताक्षरों के सहारे उनकी फर्म की जमीन गैरकानूनी तरीके से बेच दी।
पुलिस को दी शिकायत
पुलिस को दी शिकायत में विकास कुमार पाडिया निवासी शालीमार बाग, दिल्ली ने बताया कि उनकी फर्म स्पाज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2011 में गांव बांय, तहसील गन्नौर में स्थित कुल 36 कनाल जमीन दो रजिस्ट्रियों के माध्यम से खरीदी थी। पहली रजिस्ट्री नंबर 1666 , 24 जून 2011 से 12 कनाल 16 मरले तथा दूसरी रजिस्ट्री नंबर 1665 से 23 कनाल 4 मरले जमीन खरीदी गई थी। खरीद के बाद से ही उक्त जमीन पर फर्म का कब्जा है और उसकी देखरेख उनके परिचित अजय जैन द्वारा की जाती रही है। शिकायत में बताया कि दिसंबर 2025 में उन्होंने अपनी जमीन पर बिजली का ट्यूबवेल कनेक्शन लिया, सफाई करवाई और एक कमरा भी बनवाया था।
जमीन के दस्तावेज निकलवाए
इसी दौरान 10 जनवरी 2026 को अजय जैन के मोबाइल पर एक व्यक्ति राजपाल द्वारा फोन कर बताया गया कि जिस जमीन की वे देखरेख कर रहे हैं, उसकी रजिस्ट्री हो चुकी है। यह सुनकर पीड़ित को संदेह हुआ और वे अगले दिन जमीन पर पहुंचे, लेकिन रविवार होने के कारण जानकारी नहीं मिल सकी।12 जनवरी 2026 को जब पीड़ित तहसील गन्नौर पहुंचे और जमीन के दस्तावेज निकलवाए, तो उन्हें पता चला कि उनकी फर्म की जमीन की रजिस्ट्री नंबर 3649 दिनांक 27 नवंबर 2025 को फर्जी तरीके से कर दी गई है। आरोप है कि प्रमोद कुमार पुत्र कर्म सिंह निवासी नसीरपुर बांगर ने अपने नाम से फर्जी अथॉरिटी लेटर तैयार कर बलबीर सिंह निवासी पिल्लू खेड़ा, जिला जींद को जमीन बेच दी।
जमीन को धोखाधड़ी से बेच दिया गया
इस पूरे मामले में प्रवीन कुमार निवासी गांव बरोदा, तहसील गोहाना, रविन्द्र निवासी गांव बांय तथा विनय कुमार डीड राइटर की मिलीभगत बताई गई है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि फर्म के डायरेक्टर के रूप में उनके, अजीता अग्रवाल और मीनू सरवोगी के जाली हस्ताक्षर कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन को धोखाधड़ी से बेच दिया गया। उन्होंने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्या रजिस्ट्री करते समय तहसील में कागजातों की जांच ठीक तरीके से नहीं की, अगर की तो इतना बड़ा घोटाला कैसे हुआ । अब देखना है कि पुलिस जांच में क्या सामने आएगा ।

