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World Sparrow Day : चुप होती चहचहाहट: गौरैया को बचाने की पुकार

Byadmin

Mar 16, 2026
World Sparrow Day

World Sparrow Day (20 मार्च) विशेष

नई दिल्ली। कभी घरों की छतों, आंगनों और खेतों में चहचहाने वाली छोटी-सी House Sparrow (गौरैया) आज धीरे-धीरे हमारी जिंदगी से गायब होती जा रही है। हर साल World Sparrow Day (20 मार्च) को मनाया जाने वाला यह दिन हमें इस सच्चाई से रूबरू कराता है कि आधुनिकता और तेज़ शहरीकरण की दौड़ में हमने अपने सबसे पुराने पंखों वाले साथी को लगभग खो दिया है।

गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों और संस्कृति का हिस्सा रही है। बचपन की सुबहें इसकी चहचहाहट से शुरू होती थीं और आंगन में बिखरे अनाज के दानों पर इसकी फुदकती टोली घर के वातावरण को जीवंत बना देती थी। लेकिन आज शहरों और गांवों दोनों में गौरैया की संख्या तेजी से घट रही है।


साहित्य और संस्कृति की सखी

भारतीय साहित्य और लोकसंस्कृति में गौरैया का विशेष स्थान रहा है। महान कवि Surdas की पदावलियों में यह कृष्ण की लीलाओं की साक्षी बनती है, जबकि संत Kabir के दोहों में यह सादगी और संतोष का प्रतीक दिखाई देती है।

लोकगीतों और ग्रामीण परंपराओं में गौरैया को प्रेम और मंगल का प्रतीक माना गया है। गांवों में विवाह और त्योहारों के गीतों में इसकी चहचहाहट को शुभ संकेत समझा जाता था।


घटती जा रही है संख्या

विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कई दशकों में गौरैया की आबादी में भारी गिरावट आई है।

  • अध्ययनों के मुताबिक भारत में गौरैया की संख्या 1960 के दशक से लगभग 60–70 प्रतिशत तक घट चुकी है।

  • Delhi NCR जैसे शहरी क्षेत्रों में यह गिरावट और भी अधिक है, जहां कई स्थानों पर गौरैया का दिखाई देना दुर्लभ हो गया है।

यह स्थिति पर्यावरणविदों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।


क्यों घट रही है गौरैया?World Sparrow Day

गौरैया की घटती संख्या के पीछे कई कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं:

  • खेतों में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग

  • मोबाइल टावरों से निकलने वाली विकिरण

  • तेजी से बढ़ता शहरीकरण और कंक्रीट के जंगल

  • घोंसले बनाने के लिए सुरक्षित स्थानों की कमी

  • Climate Change और बढ़ता तापमान


गौरैया: एक नजर में

तथ्य जानकारी
वैज्ञानिक नाम पासर मॉन्टेनस
लंबाई 12–15 सेमी
वजन 25–35 ग्राम
जीवनकाल लगभग 3–5 वर्ष
भोजन कीड़े-मकोड़े और अनाज
अंडे एक बार में 4–6

छोटे प्रयास से बड़ा बदलाव

पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समाज मिलकर प्रयास करे तो गौरैया को बचाया जा सकता है। कई शहरों में चलाए गए अभियानों से सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।

उदाहरण के तौर पर Nashik (महाराष्ट्र) में चलाए गए एक संरक्षण अभियान के बाद कुछ वर्षों में गौरैया की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।


ऐसे बचाई जा सकती है गौरैया

गौरैया के संरक्षण के लिए आम लोग भी छोटे-छोटे प्रयास कर सकते हैं:

  • घरों की छत या दीवार पर लकड़ी का छोटा घोंसला लगाएं

  • आंगन या बालकनी में पानी का बर्तन रखें

  • अनाज के दाने या बाजरा डालें

  • कीटनाशकों का कम उपयोग करें

  • पार्क और हरियाली को बढ़ावा दें


केवल पक्षी नहीं, हमारी संस्कृति का हिस्सा

गौरैया का लुप्त होना केवल एक पर्यावरणीय संकट नहीं बल्कि सांस्कृतिक क्षति भी है। यह वह चिड़िया है जिसने सदियों तक हमारे घरों और खेतों के साथ जीवन साझा किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी भी जागरूकता और संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियां गौरैया को केवल किताबों और तस्वीरों में ही देख पाएंगी।

विश्व गौरैया दिवस हमें यह याद दिलाता है कि प्रकृति के साथ हमारा रिश्ता कितना गहरा है। इस छोटी-सी चिड़िया को बचाना केवल पर्यावरण की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाने का भी प्रयास है।

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