Natoinal News
- भारत कपड़ा उद्योग को अमेरिकी बाजार से बाहर करेगा
- ट्रंप के टैरिफ से टेक्सटाइल उद्योग को सबसे ज्यादा नुकसान
- भारत ने ब्रिटेन, जापान और कोरिया समेत 40 देशों के साथ कारोबार की योजना बनाई
- यह देश सालाना 590 अरब डॉलर से ज्यादा के टेक्सटाइल और कपड़ा करते हैं आयात
- भारतीय बाजार में इनकी हिस्सेदारी अभी 5 से 6 प्रतिशत
Natoinal News : नई दिल्ली। अमेरिकी टैरिफ से सबसे पहले और सबसे ज्यादा संकट टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ने वाला है, क्योंकि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ बुधवार से लगा दिया है, जिसमें 25 फीसदी पेनाल्टी के तौर पर है। भारत ने अमेरिका के इस फैसले को एकतरफा और अनुचित करार दिया है। साथ ही भारत दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना शुरू कर दिया है, ताकि टैरिफ के प्रभाव को कम किया जा सके। भारतीय वस्त्र उत्पादों पर 50 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाए जाने के बीच केंद्र सरकार ने वस्त्र निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 40 देशों में विशेष संपर्क कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई है। एक सरकारी अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। अमेरिका की तरफ से भारतीय उत्पादों पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क 27 अगस्त से लागू हो गया है। इस तरह कुल आयात शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है।
इन देशों से बढ़ाएंगे संपर्क
इस पहल के तहत ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, पोलैंड, कनाडा, मेक्सिको, रूस, बेल्जियम, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों को शामिल किया गया है। अधिकारी ने कहा, इन 40 बाजारों में भारत एक विश्वसनीय, गुणवत्ता-युक्त, टिकाऊ और नवाचारी वस्त्र उत्पादों का आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में काम करेगा। इसमें भारतीय मिशन और निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (ईपीसी) की अहम भूमिका होगी।
220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात कर रहे
भारत पहले से ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है लेकिन ये 40 देश मिलकर करीब 590 अरब डॉलर का वैश्विक वस्त्र एवं परिधान आयात करते हैं। इस आयात में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल महज पांच-छह प्रतिशत है। ऐसे परिदृश्य में इन देशों के साथ विशेष संपर्क की यह पहल बाजार विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होने जा रही है।
इन क्षेत्राें पर असर
इसका वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, मछली, रसायन और मशीनरी जैसे क्षेत्रों के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। अकेले वस्त्र क्षेत्र की अमेरिका को होने वाली निर्यात क्षति 10.3 अरब डॉलर हो सकती है। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर ने कहा, “25 प्रतिशत शुल्क दर को तो उद्योग ने पहले ही स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगने से भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की तुलना में 30-31 प्रतिशत तक घट गई है। इससे भारतीय वस्त्र उद्योग अमेरिकी बाजार से लगभग बाहर हो गया है।”