Nationa News
- -‘राजनीतिक-आर्थिक स्थिरता’ के साथ ही पारदर्शी नीतियों पर टिका है भारत: प्रधानमंत्री
- -भारत-जापान एशियाई सदी में स्थिरता, विकास और समृद्धि को मिलकर आकार देंगे।
- -यह जानकारी पीएम ने टोक्यो में ‘भारत-जापान आर्थिक फोरम’ को संबोधित करते हुए दी।
Nationa News : नई दिल्ली। 50 फीसदी टैरिफ से उठे आर्थिक संकट के बीच शुक्रवार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय जापान यात्रा की शुरुआत हुई। वह टोक्यो पहुंचे और वहां पर सबसे पहले उन्होंने ‘भारत-जापान आर्थिक फोरम’ को संबोधित किया। जिसमें नाम लिए बगैर पीएम ने अमेरिका को साफ शब्दों में ये संदेश दे दिया कि ‘भारत में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता’ तो है ही। उसके साथ ही नीतियों में पूर्वानुमान और पारदर्शिता भी मौजूद है। कारोबारी सुगमता के इन प्रयासों ने भारतीय बाजार को लेकर निवेशकों के मन में एक नया विश्वास कायम किया है। जो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भारत की नवीनतम रेटिंग में सुधार से भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान अशांत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को लेकर विश्वसनीय मित्रों के बीच गहरी होती आर्थिक साझेदारी विशेष रूप से प्रासंगिक है। आज भारत दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। जल्द ही हम तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर हैं। विदेश मंत्रालय ने 29 अगस्त को पीएम के संबोधन के बारे में जानकारी साझा की।
एशियाई सदी को देंगे आकार
प्रधानमंत्री ने जापान की कंपनियों को भारत में व्यापार-निवेश के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक से लेकर हरित ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निवेश के लिए भारत एक आकर्षक स्थान है। जापानी व्यापार को वैश्विक दक्षिण के देशों तक पहुंचाने के लिए भारत, जापान को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। दोनों देश एकजुटता से स्थिरता, विकास और समृद्धि के साथ एशियाई सदी को आकार देंगे। आर्थिक फोरम का आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और जापान व्यापार महासंघ (कीदानरेन) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। जिसमें जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा और दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स फोरम के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ ही दोनों देशों के उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।
बड़े सुधारों से रूबरू कराया
उन्होंने कहा, दोनों देशों के संबंधों के केंद्र में विशेष रणनीतिक-वैश्विक साझेदारी है। अंतरराष्ट्रीय विकास में भारत का योगदान 18 फीसदी है। हमारे पूंजीगत बाजार में अच्छे रिटर्न मिल रहे हैं, बैंकिंग सेक्टर भी मजबूत है। कम महंगाई के साथ ब्याज दरें भी कम हैं। देश के पास करीब 700 बिलियन डॉलर का फॉरेक्स रिजर्व है। बदलाव के पीछे हमारा दृष्टिकोण सुधार, प्रदर्शन और बदलाव का है। 2017 में हमने वन नेशन-वन टैक्स की शुरुआत की थी। अब इसमें नए और बड़े सुधार लाने पर काम जारी है। पीएम ने बताया कि कुछ समय पहले हमारी संसद ने नए और सरल आयकर कोड को भी मंजूरी दी है। इन सुधारों का संबंध केवल कर प्रणाली तक सीमित नहीं है। हमने व्यापार की सुगमता पर भी जोर देते हुए उसके लिए एकल डिजिटल विंडो की व्यवस्था की है। भारत ने रक्षा, अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। अब हम इसमें परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को भी शामिल करने जा रहे हैं। सुधारों के पीछे का उद्देश्य विकसित भारत बनाने का है। हमारी प्रतिबद्धता, रणनीति और दृढ़ विश्वास है, जिसे दुनिया ने पहचानने के साथ ही सराहा भी है। आज दुनिया भारत को न केवल देख रही है। बल्कि उसका आकलन भी करती है।
इन 5 सुधारों से मजबूत होगी साझेदारी
दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए पीएम मोदी ने 5 सुझाव दिए। जिनमें पहला- मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो सेक्टर की सफलता के जादू को भारत-जापान मिलकर बैटरीज, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, शिप बिल्डिंग और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोहरा सकते हैं। ग्लोबल साउथ खासतौर पर अफ्रीका के विकास में भी दोनों की भागीदारी रहेगी। मेक इन इंडिया-मेक फॉर द वर्ल्ड के लिए जापानी कंपनियों को आमंत्रित करते हुए उन्होंने कहा कि सुजुकी और डाइकिन की सफलता की कहानियां फिर से दोहराई जा सकती हैं।
दूसरा- तकनीक और इनोवेशन, जापान टेक और भारत एक टैलेंट पावर हाउस है। हमने एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक, स्पेस में बड़े-महत्वाकांक्षी निर्णय लिए हैं। जापान की तकनीक और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकते हैं।
तीसरा- ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन, भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य रखा है। सोलर सेल या ग्रीन हाइड्रोजन साझेदारी की भरपूर संभावनाएं हैं। दोनों के बीच संयुक्त क्रेडिट तंत्र को लेकर समझौता हुआ है। जिसका लाभ उठाकर स्वच्छ और हरित भविष्य के निर्माण में सहयोग किया जा सकता है।
चौथा- अगली पीढ़ी का इंफ्रास्ट्रक्चर, बीते 1 दशक में हमारे बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हुई है। 160 से अधिक हवाईअड्डे, 1 हजार किमी. लंबी मेट्रो लाइन बनी है। जापान के सहयोग से मुंबई, अहमदाबाद हाईस्पीड रेल लाइन पर काम जारी है। जापान की उत्कृष्टता और भारत का कौशल एक उचित भागीदारी का निर्माण कर सकते हैं।
पांचवां- कौशल विकास व लोगों के संबंध, प्रतिभाशाली भारतीय युवाओं को जापानी भाषा और सॉफ्ट स्किल का प्रशिक्षण देकर जापान रेडी वर्कफोर्स तैयार हो सकती है। जो साझा विकास में मददगार होगी। दोनों देशों की भागीदारी सामरिक और स्मार्ट है। जिसके पीछे आर्थिक तर्क मौजूद है। दोनों देश साझा हितों को साझा समृद्धि में तब्दील कर सकते हैं।
सौंपी गई आईजेबीएलएफ की रिपोर्ट
कार्यक्रम में 12वें भारत-जापान बिजनेस लीडर्स फोरम (आईजेबीएलएफ) के सह-अध्यक्षों द्वारा इसकी रिपोर्ट दोनों नेताओं को भेंट की। भारत-जापान के बीच बढ़ती उद्योग साझेदारी का उल्लेख करते हुए जापान एक्सटर्नल ट्रेड आर्गेनाइजेशन (जेईटीआरओ) के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी नोरिहिको इशिगुरो ने इस्पात, कृत्रिम मेधा, अंतरिक्ष, शिक्षा, कौशल, स्वच्छ ऊर्जा और मानव संसाधन का आदान-प्रदान जैसे तमाम क्षेत्रों में भारत, जापान की कंपनियों के बीच हस्ताक्षरित बी2बी समझौता ज्ञापनों की घोषणा की।
मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं की दरकार
जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए भारतीय प्रतिभाओं, जापानी प्रौद्योगिकी के बीच साझेदारी के लिए जापान की कंपनियों की रुचि जाहिर की। उन्होंने दोनों देशों के बीच तीन प्राथमिकताओं पर जोर दिया। जिसमें पी2पी साझेदारी को मजबूत बनाना, प्रौद्योगिकी का संयोजन, हरित पहल व बाजार, उच्च-उभरती हुई प्रौद्योगिकियों जिसमें मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर जैसे अहम क्षेत्र में सहयोग पर जोर दिया।
—