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Indian rail : भारत की ‘पहली’ हाइड्रोजन ट्रेन 31 मार्च तक पटरियों पर दौड़ेगी, यह दुनिया की सबसे लंबी ट्रेन

Byadmin

Mar 7, 2025

Indian rail

 

  • -चेन्नई स्थित इंटरगल कोच फैक्ट्री में फिलहाल यह ट्रेन बनाई जा रही
  • – बाईप्रोडक्ट के रूप में केवल जल वाष्प छोड़ती है, जिससे यह जीरो इमीशन ट्रांसपोर्ट सोल्यूशन बन जाता है।
  • -भारत के व्यापक दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में 35 हाइड्रोजन ईंधन सेल-बेस्ड ट्रेनों का एक बेड़ा विकसित होगा

 

Indian rail : । भारतीय रेलवे, टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाने के लिए तैयार है। जी हां, 31 मार्च तक देश की पहली हाइड्रोजन-ईंधन वाली ट्रेन शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस ईको-फ्रेंडली इनोवेशन भारत भी जर्मनी, फ्रांस, चीन और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के साथ ग्रीन मोबिलिटी में सबसे आगे देशों में शामिल हो जाएगा। रेल मंत्रालय ने क्लीन एनर्जी ट्रांसपोर्टेशन के लिए भारत के व्यापक दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में 35 हाइड्रोजन ईंधन सेल-बेस्ड ट्रेनों का एक बेड़ा विकसित करने के लिए 2023-24 में 2,800 करोड़ रुपए आवंटित किए थे।

यह एक अत्याधुनिक परियोजना

वैष्णव ने कहा िक भारतीय रेलवे ने डीजल इलेक्िट्रक मल्टीपल यूनिट (डेमू) रैक पर हाइड्रोजन ईंधन सेल के रेट्रोफिटमेंट द्वारा पायलट आधार पर पहली हाइड्रोजन ट्रेन के डेवलपमेंट के लिए एक अत्याधुनिक परियोजना शुरू की है। यह मौजूदा वक्त में दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन होगी। यह दुनिया की सबसे ज्यादा पावर वाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक होगी।

नॉर्दर्न रेलवे के दिल्ली डिवीजन द्वारा चलाई जाएगी

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बात पर जोर डाला है कि इन ट्रेनों के लिए स्पेसिफिकेशन्स को रिसर्च िडजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित किया गया था ताकि यह यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह तकनीक पूरी तरह से भारत में निर्मित है। चेन्नई स्थित इंटरगल कोच फैक्ट्री में फिलहाल यह ट्रेन बनाई जा रही है। और एक बार निर्मार्ण पूरा होने के बाद यह ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर करीब 89किमी की दूरी कवर करते हुए नॉर्दर्न रेलवे के दिल्ली डिवीजन द्वारा चलाई जाएगी।

क्या हैं खासियतें?

-बेजोड़ पावर कैपेसिटी है

-1,200 हॉर्स पावर
-दुनियाभर में अधिकतर
-मौजूदा हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेनों में 500 से 600 हॉर्स पावर  के बीच क्षमता वाले इंजन
-ट्रेन फ्यूल सेल्स का इस्तेमाल करके चलेगी, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के संयोजन से बिजली जेनरेट करती है और बाईप्रोडक्ट के रूप में केवल जल वाष्प छोड़ती है, जिससे यह जीरो इमीशन ट्रांसपोर्ट सोल्यूशन बन जाता है।

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