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Hydrogen Train :- भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल शुरू

Byadmin

Feb 26, 2026
Hydrogen Train

भारत की पहली Hydrogen Train की रनिंग ट्रायल शुरू 🚆

भारत में रेलवे तकनीक के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। देश की पहली hydrogen train की रनिंग ट्रायल हरियाणा के जींद जंक्शन से शुरू हो चुकी है। यह पहल न सिर्फ रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि ग्रीन एनर्जी और प्रदूषण मुक्त परिवहन की ओर भी महत्वपूर्ण बदलाव है।

बुधवार सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर जींद जंक्शन से ट्रेन सोनीपत की ओर रवाना हुई। यह ट्रायल भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


Hydrogen Train क्या है?

Hydrogen train एक ऐसी ट्रेन होती है जो डीजल की जगह हाइड्रोजन गैस से चलती है। इसमें फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से बिजली बनती है।

इस प्रक्रिया में:

  • धुआं नहीं निकलता

  • कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है

  • केवल पानी और भाप निकलती है

दुनिया में इस तकनीक का सफल उपयोग जर्मनी जैसे देशों में हो चुका है। अब भारत भी इस ग्रीन टेक्नोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


जींद से शुरू हुआ पहला ट्रायल :-

ट्रायल की मुख्य बातें:

  • सुबह 7 बजे ट्रेन को यार्ड से बाहर निकाला गया

  • शुरुआत में डीजल इंजन की सहायता ली गई

  • हांसी रोड पुल के नीचे तक ट्रेन लाई गई

  • सुबह 8:25 बजे जींद जंक्शन से सोनीपत के लिए रवाना

ट्रायल के दौरान:

  • डीजल इंजन को अलग किया जाएगा

  • ट्रेन को पूरी तरह हाइड्रोजन गैस पर चलाकर परीक्षण होगा

  • इंजन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम और ईंधन खपत की जांच की जाएगी


संभावित रूट और स्पीड

प्रारंभिक चरण में ट्रेन को:

  • जींद से पिंडारा

  • फिर भम्भेवा स्टेशन तक

ले जाया जाएगा।

मुख्य आंकड़े:

  • जींद से सोनीपत दूरी: लगभग 90 किलोमीटर

  • अनुमानित स्पीड: 140 किमी प्रति घंटा तक

  • कुल यात्रा समय: लगभग 1 घंटा

यदि ट्रायल सफल रहता है तो जल्द ही इस रूट पर नियमित संचालन शुरू किया जा सकता है।


Hydrogen Train क्यों है खास?

Hydrogen train कई कारणों से खास मानी जा रही है:

1. पर्यावरण के लिए बेहतर

  • शून्य कार्बन उत्सर्जन

  • डीजल पर निर्भरता कम

  • स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग

2. ईंधन की बचत

  • लंबे समय में कम परिचालन लागत

  • आयातित ईंधन पर निर्भरता घटेगी

3. आधुनिक रेलवे की दिशा में कदम

  • हाई स्पीड क्षमता

  • उन्नत ब्रेकिंग सिस्टम

  • बेहतर सिग्नलिंग और ट्रैक मॉनिटरिंग


ट्रायल के दौरान सुरक्षा उपाय

रेलवे विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि ट्रैक के पास न जाएं। ट्रायल के दौरान:

  • तकनीकी टीम लगातार निगरानी करेगी

  • ट्रैक की स्थिति की जांच

  • सिग्नलिंग सिस्टम का परीक्षण

  • सुरक्षा मानकों का निरीक्षण


देरी का कारण क्या था?

हालांकि उम्मीद थी कि जनवरी में ही ट्रायल पूरा हो जाएगा, लेकिन कुछ तकनीकी चुनौतियां सामने आईं।

मुख्य समस्याएं:

  • बढ़ती ठंड के कारण गैस में नमी

  • गैस भरने में दिक्कत

  • वायरिंग से जुड़ी तकनीकी तैयारी

एक जनवरी को ट्रेन दिल्ली से जींद पहुंची थी। पांच जनवरी को लखनऊ से स्पेशल कोच में उपकरण लाए गए थे। लगातार तकनीकी सुधार के बाद अब ट्रायल शुरू हुआ है।


Indian Railways के लिए क्या मायने?

भारत का रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है। यदि hydrogen train सफल रहती है, तो भविष्य में:

  • अन्य रूट्स पर विस्तार

  • डीजल इंजनों की संख्या में कमी

  • ग्रीन रेलवे मिशन को बढ़ावा

यह कदम भारत को स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन की दिशा में आगे ले जाएगा।


Hydrogen Train बनाम Diesel Train

तुलना Hydrogen Train Diesel Train
ईंधन हाइड्रोजन गैस डीजल
प्रदूषण लगभग शून्य अधिक
ध्वनि कम अधिक
पर्यावरण प्रभाव सकारात्मक नकारात्मक

भविष्य की संभावनाएं

यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो:

  • सोनीपत ट्रैक पर नियमित सेवा

  • अन्य राज्यों में विस्तार

  • हाई स्पीड ग्रीन ट्रेन नेटवर्क

यह भारत के “ग्रीन मोबिलिटी” विजन को मजबूत करेगा।

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