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Haryana Telecom Limited Land Case सुभाष बतरा और बीबी बतरा को 50-50 लाख का नोटिस, जमीन विवाद पर बयानबाजी पड़ी भारी

Byadmin

Mar 14, 2026
Haryana Telecom

Haryana Telecom Limited Land Case

रोहतक में जमीन से जुड़े एक विवादित मामले में पूर्व गृहमंत्री सुभाष बतरा और रोहतक के विधायक बीबी बतरा को बड़ी कानूनी चेतावनी मिली है। हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड कंपनी ने दोनों नेताओं को 50-50 लाख रुपये का नोटिस जारी किया है।

कंपनी की ओर से कहा गया है कि नेताओं ने कंपनी और जमीन खरीद प्रक्रिया को लेकर गलत और भ्रामक बयानबाजी की है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि एक सप्ताह के भीतर माफी मांगी जाए, अन्यथा दोनों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

यह मामला रोहतक के आईएमटी क्षेत्र में स्थित जमीन से जुड़ा है, जिस पर पहले से ही कानूनी विवाद चल चुका है और सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई हो चुकी है।


क्या है पूरा रोहतक जमीन विवाद मामला

रोहतक के आईएमटी क्षेत्र में करीब 20 एकड़ जमीन पर पहले हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड कंपनी स्थापित थी। कंपनी के डायरेक्टर के अनुसार, वर्ष 2020 में यह कंपनी दिवालिया घोषित हो गई थी।

इसके बाद कंपनी के लेनदार और संबंधित विभाग अपने-अपने दावों को लेकर अदालत पहुंचे। कानूनी प्रक्रिया के तहत कंपनी को खरीदने के लिए बोली प्रक्रिया (Bidding Process) शुरू की गई।

मुख्य तथ्य:

  • कंपनी दिवालिया घोषित – 2020

  • कुल जमीन – लगभग 20 एकड़

  • बोली लगाई गई – 25 करोड़ 14 लाख रुपये

  • यह बोली सबसे अधिक थी

  • लेनदारों ने 31 अक्टूबर 2020 को मंजूरी दी

कंपनी का दावा है कि पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार पूरी की गई थी।


जमीन खरीद प्रक्रिया पर लगाए गए थे आरोप

पूर्व गृहमंत्री सुभाष बतरा ने इस जमीन खरीद को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए थे।

मुख्य आरोप:

  • जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 300 करोड़ रुपये बताई गई

  • आरोप लगाया गया कि कंपनी को सिर्फ 25 करोड़ रुपये में खरीद लिया गया

  • खरीद प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप

इसी मुद्दे को रोहतक के विधायक बीबी बतरा ने भी हरियाणा विधानसभा में उठाया था।

कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि ये आरोप तथ्यों से परे और भ्रामक हैं।


कंपनी डायरेक्टर का बयान

हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड की डायरेक्टर नीलम सचदेवा ने बताया कि जिस जमीन और कंपनी को लेकर बयान दिए जा रहे हैं, वह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया से खरीदी गई है।

उनका कहना है:

  • कंपनी का प्लान सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार मंजूर हुआ

  • सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड मौजूद हैं

  • आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं

नीलम सचदेवा ने कहा कि यदि आरोप वापस नहीं लिए गए तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


एनसीएलटी और एनसीएलएटी में भी मामला पहुंचा

डायरेक्टर के अनुसार, कंपनी के पुनर्गठन योजना को लेकर कई कानूनी आपत्तियां दर्ज की गई थीं।

कानूनी प्रक्रिया इस प्रकार रही:

  1. 5 मार्च 2021 – विभाग ने योजना पर आपत्ति दर्ज की

  2. 12 अप्रैल 2023 – एनसीएलटी ने योजना को मंजूरी दी

  3. मामला एनसीएलएटी (National Company Law Appellate Tribunal) में गया

  4. 9 नवंबर 2023 – कंपनी के पक्ष में फैसला आया

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।


सुप्रीम कोर्ट में भी कंपनी के पक्ष में फैसला

डायरेक्टर के अनुसार, विभाग और आपत्ति दर्ज कराने वाले पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

मुख्य घटनाक्रम:

  • 2 जनवरी 2024 – सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्टे लगाया

  • विस्तृत सुनवाई हुई

  • दस्तावेज और प्रक्रिया की जांच की गई

आखिरकार 22 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में फैसला दिया।

कंपनी का दावा है कि इसके बाद पुनर्गठन योजना को पूरी तरह लागू कर दिया गया।


सभी विभागों ने दी एनओसी

कंपनी अधिकारियों के अनुसार, जब मामला अदालतों में कंपनी के पक्ष में तय हो गया, तब सभी संबंधित विभागों ने भी एनओसी (No Objection Certificate) जारी कर दी।

कंपनी का कहना है:

  • जमीन की खरीद कंपनी टेकओवर के माध्यम से हुई

  • इसमें स्टांप ड्यूटी लागू नहीं होती

  • स्टांप ड्यूटी चोरी का आरोप पूरी तरह गलत है


कंपनी ने क्यों भेजा 50-50 लाख का नोटिस

कंपनी का आरोप है कि नेताओं के बयान से कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

नोटिस में कहा गया है:

  • सार्वजनिक मंचों पर गलत बयान दिए गए

  • विधानसभा में भी मुद्दा उठाकर कंपनी की छवि खराब की गई

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए गए

इसी कारण 50-50 लाख रुपये का नोटिस जारी किया गया है।


रोहतक राजनीति में बढ़ सकता है विवाद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब रोहतक की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

संभावित प्रभाव:

  • कांग्रेस और अन्य दलों के बीच बयानबाजी

  • जमीन खरीद प्रक्रिया पर फिर से बहस

  • कानूनी कार्रवाई की संभावना

यदि माफी नहीं मांगी जाती तो मामला मानहानि केस तक भी पहुंच सकता है।

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