Haryana Power Payment Controversy
सिक्किम ऊर्जा लिमिटेड से जुड़े बिजली खरीद विवाद ने पकड़ा तूल
चंडीगढ़: हरियाणा की बिजली कंपनियों द्वारा Sikkim Urja Limited को करीब 1300 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान कथित तौर पर मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री की मंजूरी के बिना कैसे कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद Nayab Singh Saini ने इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। बताया जा रहा है कि यह भुगतान अक्टूबर 2025 में किया गया था।
मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी
सरकारी प्रक्रिया के अनुसार इतनी बड़ी राशि का भुगतान सामान्यतः ऊर्जा मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद ही किया जाता है। लेकिन इस मामले में कथित तौर पर संबंधित अधिकारियों ने यह प्रक्रिया नहीं अपनाई।
ऊर्जा मंत्री Anil Vij ने भी कहा कि बिजली कंपनियों ने यह भुगतान एकतरफा तरीके से किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में उनसे या मुख्यमंत्री से कोई आदेश नहीं लिया गया था।
मंत्री के अनुसार ऐसे मामलों में राजनीतिक स्तर पर अनुमति लेना आवश्यक होता है। उन्होंने यह भी बताया कि भुगतान से जुड़े कुछ अधिकारियों का अक्टूबर में तबादला कर दिया गया था।
बिजली खरीद समझौते से जुड़ा है विवाद
यह पूरा विवाद सिक्किम की Teesta-III Hydroelectric Project से जुड़ा हुआ है, जिसकी क्षमता लगभग 1200 मेगावाट है।
हरियाणा की बिजली कंपनियों ने वर्ष 2006 में इस परियोजना के साथ बिजली खरीद समझौता किया था। हालांकि मार्च 2018 में इस समझौते को समाप्त कर दिया गया था।
कंपनियों का तर्क था कि परियोजना की लागत 5700 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 13,965 करोड़ रुपये हो गई है, जिससे बिजली की कीमतें काफी बढ़ सकती थीं और इसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता।
सीईआरसी ने समझौता समाप्त करना बताया अवैध
22 नवंबर 2022 को Central Electricity Regulatory Commission (CERC) ने अपने आदेश में हरियाणा कंपनियों द्वारा समझौता समाप्त करने के फैसले को अवैध बताया।
आयोग ने कहा कि परियोजना से जुड़े पक्षों को व्यावसायिक संचालन की तिथि से तय टैरिफ के अनुसार भुगतान पाने का अधिकार है।
इसके बाद Appellate Tribunal for Electricity (APTEL) में अंतरिम रोक की मांग की गई थी, लेकिन 19 अप्रैल 2024 को अधिकरण ने सीईआरसी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
हालांकि अधिकरण ने यह शर्त रखी कि भुगतान तभी किया जाए जब कंपनी बिना शर्त बैंक गारंटी जमा करे और अंतिम निर्णय आने तक भुगतान को अंतरिम माना जाएगा।
फ्लैश फ्लड से परियोजना को हुआ था भारी नुकसान
अक्टूबर 2023 में सिक्किम में आई फ्लैश फ्लड से Teesta-III Hydroelectric Project को भारी नुकसान हुआ था और उस समय परियोजना का संचालन बंद हो गया था।
कंपनी ने अधिकरण को बताया था कि परियोजना को फिर से शुरू करने के लिए तत्काल वित्तीय सहायता की जरूरत है।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Acuité Ratings & Research की 30 जुलाई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी को हरियाणा की बिजली कंपनियों से लगभग 1535 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी।
बाद में करीब 1300 करोड़ रुपये का भुगतान मिलने और लगभग 500 करोड़ रुपये का बीमा दावा प्राप्त होने के बाद परियोजना की वित्तीय स्थिति में सुधार बताया गया।
पहले भी हुआ था बड़ा भुगतान
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वर्ष 2022 में हरियाणा की बिजली कंपनियों ने Adani Power को 712.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया था
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यह भुगतान सीईआरसी, एपीटीईएल और Supreme Court of India के आदेशों के आधार पर किया गया था
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उस समय यह राशि मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद जारी की गई थी
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मामला मंत्रिपरिषद के सामने भी रखा गया था और एडवोकेट जनरल की राय ली गई थी
प्रमुख सवाल
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क्या अधिकारियों ने प्रक्रिया का उल्लंघन किया?
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बिना राजनीतिक मंजूरी इतनी बड़ी राशि कैसे जारी हुई?
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क्या सरकार इस मामले की जांच कराएगी?
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क्या अंतिम फैसला आने के बाद यह भुगतान वापस लिया जा सकता है?
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