Cloning Technique
- क्लोनिंग तकनीक में करनाल के एनडीआरआई ने पशु प्रजनन में रचा इतिहास
एनडीआरआई करनाल ने बदली डेयरी की दिशा - अब क्लोनिंग तकनीक से उसी मादा के अंडों से कई बछड़ों को जन्म दिया जा सकेगा
- फिलहाल जन्मी बछड़ी का नामकरण नहीं हुआ, शीघ्र ही उसका नाम तय होगा
Cloning Technique : करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), करनाल ने पशुपालन और डेयरी विज्ञान के क्षेत्र में इतिहास रचते हुए गाय ‘गंगा’ से श्वेत क्रांति लाने का सफल प्रयोग किया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार क्लोनिंग तकनीक से बछड़ी को जन्म दिलवाने में सफलता हासिल की है। यह बछड़ी संस्थान द्वारा पूर्व में क्लोनिंग से तैयार की गई उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली गाय ‘गंगा’ के अंडाणुओं से तैयार की गई है। अब इससे एक ही उच्च नस्ल की गाय से कई गुणवत्तापूर्ण पशुओं को जन्म देने की राह खुल गई। पहले जहां एक मादा पशु से एक ही बछड़ा पैदा होता था, वहीं अब क्लोनिंग तकनीक से उसी मादा के अंडों से कई बछड़ों को जन्म दिया जा सकेगा। फिलहाल जन्मी बछड़ी का नामकरण नहीं हुआ है, लेकिन संस्थान ने संकेत दिया है कि शीघ्र ही उसका नाम तय कर दिया जाएगा।
समय भी कम लगेगा
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि जहां इस प्रक्रिया में में 48 महीने लगते थे, वहीं इस इस तकनीक से यह प्रक्रिया 36 से 38 महीने में ही पूरी हो सकेगी। यह प्रक्रिया पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक कुशल, सुरक्षित और नैतिक है।
नाम दिया मल्टीप्लिकेशन तकनीक
वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को मल्टीप्लिकेशन तकनीक का नाम दिया है, जिसके तहत एक गाय की जेनेटिक श्रेष्ठता को कई बछड़ों में दोहराया जा सकेगा। इससे डेयरी क्षेत्र में गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।
वैश्विक स्तर पर मिल रही सराहना
एनडीआरआई की इस उपलब्धि ने न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया है। भारत पहले ही क्लोनिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर चुका है। अब मल्टीप्लिकेशन तकनीक ने इसे नई दिशा दी है। इससे भारत में दूध की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।