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Axiom Mission-4 : शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने वाले पहले भारतीय एस्ट्रोनॉट बने

Axiom Mission-4

  • -तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंच रचा इतिहास
  • -एंट्री के बाद आईएसएस क्रू मेंबर से गले मिले
  •  शुभांशु बोले, यहां एक बच्चे की तरह सीख रहा हूं, अंतरिक्ष में चलना और खाना कैसे है

Axiom Mission-4 : नई दिल्ली। अंतरिक्ष यान ‘ड्रैगन’ के अंतरिक्ष प्रयोगशाला से जुड़ने के साथ ही बृहस्पतिवार को भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य यात्रीAxiom Mission-4 : नई दिल्ली। अंतरिक्ष यान ‘ड्रैगन’ के अंतरिक्ष प्रयोगशाला से जुड़ने के साथ ही बृहस्पतिवार को भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पहुंच गए। इसके साथ ही भारत ने इतिहास रच दिया। यह पहली बार है जब कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री आईएसएस की यात्रा पर गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ ने कहा, ‘बृहस्पतिवार को सुबह 6:31 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 4:01 बजे) एक्सिओम मिशन-4 के तहत स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान चौथे निजी अंतरिक्ष यात्री मिशन के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचा।’ 28 घंटे के सफर के बाद चारों यात्री आईएसएस पहुंचे हैं। स्पेस स्टेशन का हैच खुला और सभी एस्ट्रोनॉट आईएसएस के अंदर दाखिल हुए। इसके बाद आईएसएस क्रू मेंबर्स से गले मिले और शुभकामनाएं दी। नासा के एक लाइव वीडियो में अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष स्टेशन के पास आते हुए दिखाया गया और ‘डॉकिंग’ प्रक्रिया भारतीय समयानुसार अपराह्न 4:15 बजे पूरी हुई।

ये पहुंचे आईएसएस

अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन मिशन कमांडर हैं और शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के लिए मिशन पायलट हैं। इनके अलावा, हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कपू एवं पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की एक्सिओम-4 मिशन का हिस्सा हैं। लखनऊ में जन्मे 39 वर्षीय शुक्ला अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। इससे 41 साल पहले भारत के राकेश शर्मा 1984 में तत्कालीन सोवियत संघ के सैल्यूट-7 अंतरिक्ष स्टेशन के तहत कक्षा में आठ दिन रहे थे।

शुभांशु ने कहा- नमस्कार फ्रॉम स्पेस!

इससे पहले दिन में क्रू ने स्पेसक्राफ्ट से लाइव बातचीत की। इसमें शुभांशु ने कहा- नमस्कार फ्रॉम स्पेस! यहां एक बच्चे की तरह सीख रहा हूं… अंतरिक्ष में चलना और खाना कैसे है। मैं हर उस व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहता हूं, जो इस यात्रा का हिस्सा रहा है। मैं समझता हूं कि यह कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, यह आप सभी की सामूहिक उपलब्धि है, जो इस यात्रा का हिस्सा रहे हैं। मैं आप सभी को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं। परिवार और दोस्तों को भी.. आपका समर्थन बहुत मायने रखता है। यह सब आप सभी की वजह से संभव हुआ है।

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