SGT University
गुरुग्राम। गुरुग्राम स्थित Shree Guru Gobind Singh Tricentenary University (SGT University) में महान गणितज्ञ Srinivasa Ramanujan की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश से आए विद्वानों ने एकमत से कहा कि रामानुजन की विरासत केवल भारत के अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि देश के वैज्ञानिक भविष्य की मजबूत आधारशिला भी है।
यह सम्मेलन भारत में समकालीन गणितीय विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। Shree Guru Gobind Singh Tricentenary University (SGT University), Association of Indian Universities और Shiksha Sanskriti Nyas के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय “रामानुजन की विरासत और उससे भविष्य की पीढ़ियों को मिलने वाली प्रेरणा” रहा।
सम्मेलन में “The Man Who Knew Infinity” के नाम से विख्यात Srinivasa Ramanujan की ऐतिहासिक प्रतिभा को 21वीं सदी की उन्नत कम्प्यूटेशनल चुनौतियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास किया गया।
रामानुजन की गणितीय खोजों पर हुआ गहन मंथन
सम्मेलन के दूसरे दिन सुबह का सत्र विश्वविद्यालय के रवींद्रनाथ टैगोर ब्लॉक में आयोजित हुआ, जिसमें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने रामानुजन की प्रसिद्ध नोटबुक्स के जटिल गणितीय पहलुओं पर चर्चा की।
Krishnan Rajkumar (Jawaharlal Nehru University) ने अपने व्याख्यान में रामानुजन के टेलिस्कोपिंग कंटीन्यूड फ्रैक्शंस के कार्य को 14वीं सदी के केरल के महान गणितज्ञ Madhava of Sangamagrama से जोड़ते हुए ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया।
आधुनिक विज्ञान में भी उपयोगी है रामानुजन का गणित
इसी क्रम में Gajendra Pratap Singh (Jawaharlal Nehru University) ने रामानुजन के संयोजनात्मक गणित की शक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पार्टिशन और जनरेटिंग फंक्शन्स पर रामानुजन का कार्य आज ग्राफ स्पेक्ट्रा, डेटा साइंस और नेटवर्क थ्योरी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विद्यार्थियों को गणित में नई सोच अपनाने की प्रेरणा
सत्र का एक विशेष आकर्षण Gaurav Bhatnagar (Ashoka University) का व्याख्यान रहा। रामानुजन और लॉग डेरिवेटिव्स पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि रामानुजन की प्रतिभा केवल दुर्लभ वरदान नहीं थी, बल्कि पैटर्न पहचानने की असाधारण क्षमता थी, जिसे समर्पित विद्यार्थी भी विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को गणित को एक स्थिर विषय नहीं बल्कि निरंतर विकसित होती तार्किक प्रक्रिया के रूप में देखने की प्रेरणा दी।
विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने प्रस्तुत किए शोध
सम्मेलन में देश के कई प्रमुख संस्थानों के विद्वानों ने अपने शोध प्रस्तुत किए।
Satyanarayana Reddy (Shiv Nadar University) ने रामानुजन सम्स के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला, जबकि A. Swaminathan (Indian Institute of Technology Roorkee) ने रामानुजन प्रकार के एंटायर फंक्शन्स की कम्प्लीट मोनोटोनिसिटी और इंटीग्रल रिप्रेजेंटेशन पर अपना शोध प्रस्तुत किया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी जुड़ी रामानुजन की सोच
भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए Jagdish Bansal (South Asian University) ने कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि रामानुजन की सहज समस्या-समाधान क्षमता को आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैचारिक पूर्वज भी माना जा सकता है।
पूरे सत्र का संचालन प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार अग्रवाल ने किया। सम्मेलन में देशभर के केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों और प्रतिभागियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे गुरुग्राम गणितीय उत्कृष्टता के एक जीवंत राष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभरा।

