बढ़ती उम्र ही नहीं, युवाओं को भी सता रहा जोड़ों का दर्द | जानें कारण और सही उपचार
Joint pain आज के समय में जोड़ों का दर्द (Joint Pain) केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गया है। बदलती जीवनशैली, पोषण की कमी, मोटापा और बढ़ते तनाव के कारण युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। यदि समय रहते इसका सही इलाज और देखभाल न की जाए तो यह समस्या दैनिक जीवन, कामकाज और जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

जोड़ों का दर्द क्या है?
जोड़ वह स्थान है जहां दो हड्डियां आपस में मिलती हैं, जैसे घुटना, कंधा, कोहनी, कलाई और टखना। जब इन जोड़ों में सूजन, जकड़न या दर्द होने लगता है तो इसे जोड़ों का दर्द कहा जाता है।
यह दर्द हल्का भी हो सकता है और गंभीर भी। कई बार यह अस्थायी होता है, लेकिन कुछ मामलों में लंबे समय तक रहकर चलने-फिरने में परेशानी पैदा कर देता है।
क्या केवल बुजुर्गों को होता है जोड़ों का दर्द?
पहले जोड़ों का दर्द बढ़ती उम्र से जोड़ा जाता था, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, तनाव, मोटापा और पोषण की कमी के कारण युवा वर्ग भी इससे प्रभावित हो रहा है।
लगातार बैठकर काम करना, मोबाइल-लैपटॉप का अधिक उपयोग और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इसके बड़े कारण हैं।
जोड़ों के दर्द के मुख्य लक्षण
यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएं:
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जोड़ों में सूजन और लालिमा
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चलने या वजन डालने पर दर्द बढ़ना
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सुबह उठते समय जकड़न
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जोड़ मोड़ने में कठिनाई
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प्रभावित हिस्से में गर्माहट
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लंबे समय तक बैठे रहने के बाद stiffness
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सूजन के साथ बुखार (तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें)
जोड़ों के दर्द के प्रमुख कारण
1. ऑस्टियोआर्थराइटिस
बढ़ती उम्र के साथ कार्टिलेज घिसने लगता है, जिससे दर्द और सूजन होती है।
2. गठिया (यूरिक एसिड बढ़ना)
शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में तेज दर्द होता है।
3. रूमेटाइड आर्थराइटिस
यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही जोड़ों पर हमला करती है।
4. पोषण की कमी
कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी हड्डियों को कमजोर बनाती है।
5. मोटापा
अधिक वजन घुटनों और टखनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
6. पुरानी चोट या गलत बैठने की आदत
लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना भी जोड़ों के दर्द का कारण बन सकता है।
जोड़ों के दर्द से बचाव के उपाय
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संतुलित आहार लें (कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-डी)
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रोजाना हल्की एक्सरसाइज या योग करें
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वजन नियंत्रित रखें
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लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें
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धूम्रपान और जंक फूड से दूरी रखें
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रोज 15–20 मिनट धूप लें
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समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं
जोड़ों के दर्द का इलाज
1. एलोपैथिक उपचार
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दर्द निवारक और एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं
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कैल्शियम सप्लीमेंट
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फिजियोथेरेपी
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इंजेक्शन या सर्जरी (गंभीर मामलों में)
⚠️ दवाएं हमेशा डॉक्टर की सलाह से लें।
2. आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेद में इसे “वात रोग” माना जाता है।
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अश्वगंधा
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गुग्गुल
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हल्दी
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त्रिफला
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पंचकर्म थेरेपी
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अभ्यंग (तेल मालिश)
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स्वेदन (भाप चिकित्सा)
यह उपचार धीरे-धीरे असर करता है लेकिन जड़ों से संतुलन पर जोर देता है।
3. होम्योपैथिक उपचार
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ब्रायोनिया
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रस् टॉक्स
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आर्निका
होम्योपैथी में मरीज के लक्षणों के आधार पर दवा दी जाती है। योग्य चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है।
किन बातों का रखें ध्यान?
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स्वयं दवा न लें
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दर्द को नजरअंदाज न करें
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भारी वजन अचानक न उठाएं
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डॉक्टर की सलाह के बिना सप्लीमेंट न लें
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लगातार दर्द होने पर जांच जरूर कराएं
क्या जोड़ों का दर्द लाइलाज है?
नहीं। जोड़ों का दर्द लाइलाज नहीं है। सही समय पर उपचार, संतुलित जीवनशैली और नियमित व्यायाम से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
लापरवाही करने पर यह गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है।
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