Maham Panchayat Ultimatum
महम (हरियाणा): Maham में इन दिनों महम पंचायत अल्टीमेटम को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। अशोक नगर इलाके में रह रहे मुस्लिम परिवारों को पंचायत द्वारा 10 दिन के भीतर स्थान खाली करने का निर्देश दिया गया है। अल्टीमेटम के चार दिन बीत चुके हैं और अब सभी की निगाहें आगामी पंचायत बैठक पर टिकी हुई हैं।
क्या है महम पंचायत अल्टीमेटम का पूरा मामला?
रविवार को किशनगढ़, इमलीगढ़ और अशोक नगर गांवों की संयुक्त पंचायत में बाहरी मुस्लिम परिवारों को लेकर चर्चा हुई। पंचायत में कुछ ग्रामीणों ने इन परिवारों को रोहिंग्या बताते हुए 10 दिन का अल्टीमेटम दिया।
हालांकि पुलिस जांच में उनके पहचान पत्र असम के पाए गए, जिससे रोहिंग्या होने के दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
ग्रामीणों की शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और सभी परिवारों के दस्तावेजों की जांच की। परिवारों का कहना है कि:
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वे असम के निवासी हैं
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पुलिस वेरिफिकेशन पहले भी हो चुका है
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वे पिछले पांच वर्षों से यहां रह रहे हैं
इससे महम पंचायत अल्टीमेटम के पीछे की कानूनी स्थिति पर चर्चा तेज हो गई है।
ग्रामीणों ने लगाए ये आरोप
कुछ ग्रामीणों और स्थानीय भाजपा नेता अजीत अहलावत ने आरोप लगाया है कि:
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इलाके में नशे का कारोबार होता है
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भैंस चोरी की घटनाएं हुई हैं
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एक छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी
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रात में संदिग्ध लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है
हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कितने परिवार रह रहे हैं और क्या है स्थिति?
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लगभग 100–150 झुग्गियां
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प्रति झुग्गी ₹1,000 किराया
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अधिकतर लोग कूड़ा बीनकर गुजारा करते हैं
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बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक नि:शुल्क पढ़ाने आता है
ये परिवार गांव के ही एक व्यक्ति के खाली प्लॉट में रह रहे हैं।
परिवारों का पक्ष – क्या बोले सनोवर?
परिवारों में से एक सदस्य सनोवर ने बताया कि वे पहले महम में दूसरी जगह रहते थे और पिछले पांच साल से किशनगढ़ में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप गलत हैं। यदि पंचायत निर्णय लेती है तो वे स्थान खाली कर देंगे।
पंचायत बैठक पर टिकी निगाहें
बुधवार को महम चौबीसी के चबूतरे पर पंचायत प्रस्तावित है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत का फैसला सर्वमान्य होगा। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।



