Budget Expectation
- कर स्लैब को महंगाई से जोड़ने की मांग, घरेलू आर्थिक मजबूती बड़ा मुद्दा
- 30% कर स्लैब की सीमा बढ़ाने, बीच की दरों को अधिक संतुलित बनाने और कर स्लैब को महंगाई से जोड़ने पर चर्चा
- विशेषज्ञ बोले, बजट 2026 एक सरल नई कर व्यवस्था की ओर बढ़ता है, तो घरेलू विश्वास में सुधार होगा
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में आयकर ढांचे को काफी हद तक सरल किया था
नई दिल्ली । भारतीय परिवारों पर जैसे-जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की बढ़ती लागत का दबाव बढ़ रहा है, वे सरकार से वित्तीय स्थिरता बहाल करने और हाथ में आने वाली आय (डिस्पोजेबल इनकम) बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि खुदरा महंगाई दर पर 1.33% पर है, लेकिन रोजमर्रा के खर्च अब भी पारिवारों के बजट पर भारी पड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार के वार्षिक बजट से पहले घरेलू आर्थिक मजबूती एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। बजट की चर्चाएं अक्सर वेतनभोगी भारतीयों के लिए एक ही सवाल पर आकर टिक जाती हैं कि क्या मध्यमवर्गीय परिवारों को मासिक नकदी प्रवाह में राहत मिलेगी? 30% कर स्लैब की सीमा बढ़ाने, बीच की दरों को अधिक संतुलित बनाने और कर स्लैब को महंगाई से जोड़ने पर चर्चा बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बजट 2026 एक सरल नई कर व्यवस्था की ओर बढ़ता है, जिसमें स्पष्ट बचत प्रोत्साहन हों, साथ ही जीएसटी सरलीकरण और बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा तथा एमएसएमई पर निरंतर खर्च हो तो घरेलू विश्वास में सुधार हो सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में आयकर ढांचे को काफी हद तक सरल किया था। इसके बावजूद हाल के वर्षों में प्रत्यक्ष कर कुल राजस्व का आधे से अधिक योगदान दे रहे हैं।
घरेलू वित्तीय स्थिरता जरूरी
36.3% लोगों का मानना है कि आयकर में कटौती 2026 में घरेलू वित्तीय स्थिरता को सबसे अधिक सुधार देगी। इससे पता चलता है कि परिवार तंग मासिक बजट के बीच तत्काल राहत चाहते हैं।
किफायती आवास की मांग
10.4% लोगों ने किफायती आवास के लिए अधिक सरकारी समर्थन की मांग की। संकेत मिलता है कि आवास वहनीयता महत्वपूर्ण मुद्दा तो है, लेकिन कर राहत और महंगाई के दबाव की तुलना में यह द्वितीयक प्राथमिकता है।
वस्तुओं की लागत घटे
35.6% लोगों ने कहा कि वस्तुओं की लागत कम करने के लिए स्थानीय उत्पादन को सक्षम बनाना घरेलू वित्त पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। इससे कीमतें घट सकती हैं और आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
रोजगार भी चिंता
17.7% नागरिकों ने अधिक रोजगार-आधारित योजनाओं की मांग की जो रोजगार सृजन और आय सुरक्षा को लेकर चिंताओं को दर्शाता है।
लोगों के अनुकूल हो कर ढांचा
भारत ने पिछले दशक में अपने कर प्रशासन का आधुनिकीकरण किया है। डिजिटलीकरण, डेटा एकीकरण और फेसलेस प्रक्रियाओं ने पारदर्शिता बढ़ाई है और विवेकाधिकार को कम किया है। फिर भी युवा पेशेवरों, गिग वर्कर्स और फ्रीलांसरों जैसे बढ़ते करदाता वर्ग के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना अब भी जटिल बना हुआ है। कई आय स्रोत, डिजिटल लेनदेन और लगातार बदलते अनुपालन मानदंड अक्सर भ्रम और चिंता पैदा करते हैं। इसलिए, जब भारत एक डिजिटल-प्रथम अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, तब एक सरल, सहज और उपयोगकर्ता-अनुकूल कर ढांचे की स्थापना अत्यंत आवश्यक है।
डीक्रीमिनलाइजेशन जरूरी
आयकर कानून के तहत अपराध मुक्तिकरण (डीक्रिमिनलाइजेशन) एक प्रमुख सुधार प्राथमिकता बना हुआ है। कई प्रावधान अब भी अनुपालन में चूक या व्याख्यात्मक विवादों से उत्पन्न चूकों के लिए करदाताओं को अभियोजन के जोखिम में डालते हैं। जानबूझकर की गई धोखाधड़ी या बड़े पैमाने पर कर चोरी जैसे मामलों तक अभियोजन को सीमित करना और तकनीकी चूकों के लिए तर्कसंगत दरों पर स्वचालित या समयबद्ध निपटान (कंपाउंडिंग) की व्यवस्था करना संतुलन बहाल करेगा और निवारक प्रभाव बनाए रखते हुए स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करेगा। एक बजट सर्वेक्षण के अनुसार अब भी आयकर कटौती बजट की सबसे अधिक मांग वाली घोषणा बनकर उभरी है। आयकर में कटौती की मांग और वस्तुओं की कुल लागत घटाने के लिए स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन देने की मांग के बीच कड़ा मुकाबला है।
