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DU Teachers Workshop News विकसित भारत बनाने के लिए अतीत से भी सबक लेना होगा : कश्मीरी लाल

DU Teachers Workshop News

  • दिल्ली विवि में ‘विकसित भारत की परिकल्पना : परिप्रेक्ष्य और चुनौतियां पर मंथन
  • दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया
  • मोदी की गारंटी है विकसित भारत @2047
  • विकसित भारत के अग्रदूत हैं नरेंद्र मोदी
  • विकसित भारत पर देश में पहला पाठ्यक्रम दिल्ली विश्वविद्यालय में
  • समृद्धि के साथ-साथ संस्कार से युक्त है विकसित भारत की परिकल्पना
  • विकसित भारत की भारतीय संकल्पना पश्चिम से अलग

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय की मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति द्वारा ‘विकसित भारत की परिकल्पना : परिप्रेक्ष्य और चुनौतियां विषय पर दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला (कैपिसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप) का आयोजन किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए आयोजित इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष प्रो. निरंजन कुमार ने विकसित भारत पर चर्चा करते हुए प्रश्न उठाया कि क्या भारत पहले एक विकसित राष्ट्र नहीं था? इस सम्बंध में आँकड़े देते उन्होंने बताया पहली से लेकर 16वीं-17वीं तक भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में जाना जाता था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पुनः विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री मोदी ने समृद्धि के साथ-साथ संस्कारयुक्त जिस विकसित भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की है, उसी को ध्यान में रखकर दिल्ली विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।

पर्यावरण और विरासत के संबंधों पर प्रकाश डाला

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठक कश्मीरी लाल ने विकास, पर्यावरण और विरासत के संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र के निर्माण में प्रयोगात्मक रूप से भी सक्रिय होना पड़ेगा। हमें रूस, अमेरिका या चीन आदि दूसरे देशों की नकल करने की बजाय अपने लिए एक भारतीय राह बनाना होगा। विलियम डेलरिंपल की पुस्तक ‘द गोल्डन रोड’ की चर्चा करते हुए उन्होंने विश्व की तरक्की का स्रोत भारत को बताया है और कहा कि विकसित भारत के निर्माण में अतीत को ओझल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के भारत का युवा अंकल चिप्स के साथ माइक्रो चिप्स, चरखा के साथ चंद्रयान, योग के साथ एल्गोरिदम की बात भी करता है। उन्होंने जोर दिया कि भारतीयों युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में पेटेंट लेने का प्रयास करना चाहिए ताकि हमारे हमारे ज्ञान पर कोई दूसरा ना दावा कर ले।

तकनीकी सत्रों में अपना व्याख्यान दिया

प्रो प्रभात मित्तल, प्रो सुरेंद्र कुमार, प्रो रेखा सक्सेना, प्रो रुपाली गोयंका और प्रो रजनी साहनी आदि ने तकनीकी सत्रों में अपना व्याख्यान दिया। यहाँ बता दें दिल्ली विश्वविद्यालय की मूल्य संवर्धन पाठ्क्रम समिति शिक्षकों के लिए इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन लगातार करती रहती है।

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