E-Performance Supercapacitor
एमडीयू ने सुपरकैपेसिटर का एक प्रोटोटाइप तैयार करके हासिल की बड़ी उपलब्धि
रोहतक। महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) रोहतक का भौतिकी विभाग ने ऊर्जा भंडारण की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल की। विभाग के एप्लाइड रिसर्च (अनुप्रयुक्त अनुसंधान) विंग में सुपरकैपेसिटर पर चल रहे अत्याधुनिक शोध ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं। डॉ. अनिल ओहलान के कुशल मार्गदर्शन में लतीशा गाबा, ईशु खत्री व प्रिया सिवाच चार शोधार्थी निरंतर ऐसी तकनीक विकसित करने में जुटे हैं, जो न केवल ऊर्जा को तेजी से स्टोर करेगी बल्कि बैटरी के मुकाबले कहीं अधिक टिकाऊ भी होगी। डॉ. अनिल ने बताया कि सुपरकैपेसिटर का एक प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह प्रोटोटाइप लैब के लिए बनाया गया है। भविष्य में इसका प्रयोग व्यावसायिक रूप में भी होगा।
क्या है सुपरकैपेसिटर और यह कैसे काम करता है
सुपरकैपेसिटर एक आधुनिक ऊर्जा भंडारण उपकरण है, जो पारंपरिक बैटरी और साधारण कैपेसिटर के बीच की कड़ी का काम करता है। जहां साधारण बैटरियां रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से ऊर्जा स्टोर करती हैं, वहीं सुपरकैपेसिटर स्थिरवैद्युत ऊर्जा का उपयोग करता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी चार्जिंग और डिस्चार्जिंग की गति है, जो बिजली की रफ़्तार से काम करती है।
विशेषताएं
इसे कई बार चार्ज और डिस्चार्ज किया जा सकता है, जबकि सामान्य बैटरियां कुछ सालों में खराब हो जाती हैं। यह अत्यधिक गर्म और ठंडे, दोनों तरह के वातावरण में समान दक्षता से कार्य करने में सक्षम है। इसमें उच्च शक्ति घनत्व होता है, जो इसे कम समय में भारी मात्रा में ऊर्जा रिलीज करने की शक्ति प्रदान करता है। सुपरकैपेसिटर का साइज कैपेसिटर से काफी छोटा है और कैपेसटी बहुत ज्यादा बढ़ेगी। यह कैपेसिटर से काफी सस्ता भी पड़ेगा।
हाइब्रिड वाहनों और रोबोटिक्स में होगा बड़ा इस्तेमाल
डॉ. अनिल ओहलान और उनकी टीम की ओर से तैयार किए गए सुपरकैपेसिटर इलेक्ट्रोड्स का परीक्षण ‘पोटेंशियोस्टेट’ नामक आधुनिक उपकरण पर किया गया है। उन्होंने बताया कि इस शोध के सफल परिणाम आने वाले समय में हाइब्रिड वाहनों के लिए वरदान साबित होंगे। वाहनों को स्टार्ट करने के लिए आवश्यक ‘पावर बर्स्ट’ और ब्रेक लगाने पर पैदा होने वाली ऊर्जा को वापस स्टोर करने (रिजेनरेशन) में यह तकनीक सबसे कारगर है। इसके अलावा, ग्रिड के स्थिरीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर/विंड) के भंडारण, और छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों जैसे कि सेंसर, स्मार्ट वॉच और रोबोटिक्स में इसका व्यापक उपयोग देखा जा रहा है।
वर्तमान में दुनिया तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों और स्मार्ट गैजेट्स की ओर बढ़ रही है। ऐसे में डॉ. ओहलान और उनके शोधार्थियों द्वारा तैयार किए गए ये उच्च प्रदर्शन वाले सुपरकैपेसिटर भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकते हैं।
आगे यह शोध चल रहा है
डॉ. अनिल ने बताया कि सामान्य बैटरी चार्ज में होने में समय लेती है व धीरे-धीरे डिस्चार्ज होती है। वहीं, सुपर कैपेसिटर चार्ज तो जल्दी हो जाता है, लेकिन डिस्चार्ज भी जल्दी हो जाता है। इस पर यह काम किया जा रहा सुपरकैपेसिटर भी बैटरी की तरह डिस्चार्ज धीरे-धीरे हो। हम कोशिश कर रहे है कि यह इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी की जगह ले। बैटरी में घनत्व ज्यादा होता व पावर कम होती है। कैपेसिटर में ऊर्जा कम होती है व पावर बहुत ज्यादा होती है। सुपरकैपेसिटर हम ऐसा बनाना चाहते है इसमें ऊर्जा भी ज्यादा हो और पावर भी ज्यादा हो। दोनों चीजे बढनी चाहिए।
इन जर्नल में प्रकाशित हो चुका है
केमिकल इंजीनियरिंग जर्नल 2025, कोलाइड और इंटरफेस साइंस में एडवांस 2025, जर्नल ऑफ़ मैटेरियल्स केमिस्ट्री 2024, जर्नल ऑफ एनर्जी स्टोरेज 2024, एडवांसेज इन कोलाइड एंड इंटरफेस साइंस 2024, जर्नल ऑफ एनर्जी स्टोरेज 2024, एप्लाइड सरफेस साइंस एडवांसेज 2024, जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री ए, 2023 मे प्रकाशित हो चुका है।
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